बरकाकला गांव में मुख्य सरकारी तालाब पर गांव के ही अजय प्रसाद मेहता व विशेश्वर प्रसाद मेहता ने जबरन मकान बना लिया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने मकान ढलाई से एक माह पूर्व अंचल अधिकारी आसफ अली को लिखित जानकरी दी थी। आवेदन के आधार पर अमीन महेश प्रसाद मेहता से अतिक्रमण स्थल की जानकारी ली। अमीन के अनुसार खाता नंबर 142 प्लॉट नंबर 1789, 1790 मे आरोपी दोषी पाया गया।
सीओ द्वारा ग्रामीणों को मकान बनने के बाद भी तोड़वाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन इस बीच अंचल द्वारा ग्रामीणोंं के अनुसार जमीन मापी तो दूर अतिक्रमण स्थल पर जाना मुनासिब नहीं समझा गया। 13 मई को आरोपी मकान की ढलाई करने लगा। ग्रामीणों ने सीओ को इसकी जानकारी दी। सीओ ने ग्रामीणो के आवेदन और अमीन के कथनानुसार थाना प्रभारी को तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया। परन्तु थाना प्रभारी सुरेश राम ने सीओ के लिखित आदेश का थोड़ा भी पालन नहीं किया। थाना प्रभारी ने सुबह 10.00 बजे से 9.00 बजे रात तक ग्रामीणों को अतिक्रमण स्थल पर जाने व रोक लगाने का आश्वासन देते रहे। परन्तु मकान ढलाई तक गांव नहीं पहुंचे।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सीओ व थाना प्रभारी के खिलाफ डीसी, एसडीओ के बाद कोडरमा सांसद डॉ. रविन्द्र कुमार राय को आवेदन दिया है । जिसमें लिखा गया है कि थाना प्रभारी व सीओ के मिलीभगत से गांव के सरकारी तालाब के भीड़ पर मकान बनाया गया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कर आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
आवेदन देने वालो मे कामेश्वर प्रसाद मेहता, महेश प्रसाद मेहता, शिबू राणा, रामेश्वर महतो, महेन्द्र प्रजापति, जगदीश राणा, बसंत नारायण मेहता, तापेश्वर प्रसाद मेहता, टुकन महतो, बिलट महतो समेत, ज्योतिष मेहता समेत सैकड़ों लोग शामिल हैं। इस संबंध मे थाना प्रभारी सुरेश राम से पूछे जाने पर बताया कि हमारे पास दो व्यक्ति आए थे। हमने सीओ के पास जाने की बात कही। सीओ से भी हमने बरकाकला जाने की बात कही पर उन्होंने नहीं आए।
इधर सीओ आसफ अली ने बताया कि मकान बनने के पूर्व आरोपी को नोटिस दिया गया था। परन्तु वह मकान बना लिया। जमीन मापी के लिए अमीन को चिट्ठी दी गई है। यदि सरकारी भूमि पर मकान बना है, तो वह टूटेगा। इधर आरोपी का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाया गया आरोप बेबुनियाद है। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।