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हैंडपंप सूखे, ग्रामीण गांवों के बाहर लगे ट्यूबवेल से पानी लाने को हो रहे मजबूर

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | भैरूपुरा ओझा

गर्मी बढ़ने के साथ ही भू-जलस्तर गिरने से गांव में लगे हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया, जिससे ग्रामीणों को पेयजल जुटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं कुछ मोहल्लों लगे हैंडपंप खराब होने से गांव में पेयजल संकट गहरा गया है।

राताबरड़ा के भंवरलाल सेन, प्रहलाद प्रजापति, शोजीलाल मीणा, मथुरालाल प्रजापत ने बताया कि कई बार सरपंच को पेयजल समस्या और खराब हैंडपंप ठीक कराने के लिए कहा, लेकिन समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों को गांव के बाहर खेतों लगे ट्यूबवेल से पानी लाना पड़ रहा है।

सरपंच संतोष सिंह जावटीकलां ने कहा कि पेयजल समस्या को लेकर जिला प्रशासन व उच्चाधिकारी को अवगत कराने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव में पशुओं के पीने के लिए भी पानी नहीं है। दूसरी ओर नयागांव पंचायत के झरबालापुरा में नगरकोट ज्वाला माता मंदिर के पास पंचायत की ओर से बनाई पानी की टंकी से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। टंकी भरने के बाद कोई भी मोटर बंद नहीं करता है। गांव के रामकरण यादव, शंकरलाल, सुरेश यादव ने बताया कि कई बार ग्रामीणों से पानी की टंकी भरने के बाद मोटर बंद करने को कहा, लेकिन वो भी इसे अनसुना कर गए, जिससे सारा दिन बिजली और पानी बर्बाद हो रहे हैं।

बूढ़करवर का एनीकट क्षतिग्रस्त, वन्यजीव गांव की ओर कर रहे रुख

करवर|
बूढ़करवर गांव के समीप पहाड़ी के बीच नला क्षेत्र में वन विभाग ने एनीकट बनवाया था, जिसके क्षतिग्रस्त होने से वन्यजीव पानी के लिए गांवों की ओर आने लगे हैं। माणी सहकारी अध्यक्ष तेजमल मीणा, पूर्व सरपंच कंचन देवी मीणा व ग्रामीणों ने कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर बरसात के पहले क्षतिग्रस्त एनीकट की मरम्मत कराने तथा पहाड़ी एरिया वन सीमा में वन्यजीवों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है। विभागीय अनदेखी के चलते अवैध खनन करने वालों ने एनीकट को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसकी दीवारों के पत्थर निकालकर ले गए। पत्र में प्रशासन से वन सीमा में टांकों का निर्माण कराकर जल्द टैंकरों से पानी की व्यवस्था करने तथा क्षतिग्रस्त एनीकट की मरम्मत कराने की मांग की।

भैरुपुरा ओझा| जंगलों में जलस्रोत सूखने से वन्यजीव गांवों की ओर आने लगे हैं। पानी के लिए रोजड़े खेतों में पहुंचकर इधर-उधर मंडराते रहते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।

20 गांवों में नहरों का पानी नहीं पहुंचाने से मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: इंद्रगढ़. चाकल बांध की नहरों से किसानों को अभी तक भी नहरी पानी नहीं मिल पाने से किसानों में नाराजगी बनी हुई हैं, जबकि मामले को लेकर पूर्व में विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। इसी मामले को लेकर रविवार को भाजपा ग्रामीण मंडल के अध्यक्ष हिम्मतसिंह हाड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया कि क्षेत्र के 20 गांवों में नहरी पानी सिंचाई के लिए पहुंचाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी तक सिंचाई का पानी पांच गांवों तक पहुंच सका है। पूर्व में विभाग के अधिकारियों के द्वारा जून माह में नहरों का सुदृढ़ीकरण करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कह रहे हैं कि बजट का अभाव है। मुख्यमंत्री से शीघ्र नहरों के सुदृढ़ीकरण करने की मांग की।

भैरूपुरा ओझा. झरबालापुरा में टंकी भरने के बाद ओवर प्लो होकर व्यर्थ बहता पानी।

करवर. बूढ़ करवर में वन क्षेत्र में बना एनिकट टूट चुका है।

भास्कर न्यूज | भैरूपुरा ओझा

गर्मी बढ़ने के साथ ही भू-जलस्तर गिरने से गांव में लगे हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया, जिससे ग्रामीणों को पेयजल जुटाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं कुछ मोहल्लों लगे हैंडपंप खराब होने से गांव में पेयजल संकट गहरा गया है।

राताबरड़ा के भंवरलाल सेन, प्रहलाद प्रजापति, शोजीलाल मीणा, मथुरालाल प्रजापत ने बताया कि कई बार सरपंच को पेयजल समस्या और खराब हैंडपंप ठीक कराने के लिए कहा, लेकिन समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों को गांव के बाहर खेतों लगे ट्यूबवेल से पानी लाना पड़ रहा है।

सरपंच संतोष सिंह जावटीकलां ने कहा कि पेयजल समस्या को लेकर जिला प्रशासन व उच्चाधिकारी को अवगत कराने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव में पशुओं के पीने के लिए भी पानी नहीं है। दूसरी ओर नयागांव पंचायत के झरबालापुरा में नगरकोट ज्वाला माता मंदिर के पास पंचायत की ओर से बनाई पानी की टंकी से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। टंकी भरने के बाद कोई भी मोटर बंद नहीं करता है। गांव के रामकरण यादव, शंकरलाल, सुरेश यादव ने बताया कि कई बार ग्रामीणों से पानी की टंकी भरने के बाद मोटर बंद करने को कहा, लेकिन वो भी इसे अनसुना कर गए, जिससे सारा दिन बिजली और पानी बर्बाद हो रहे हैं।

बूढ़करवर का एनीकट क्षतिग्रस्त, वन्यजीव गांव की ओर कर रहे रुख

करवर|
बूढ़करवर गांव के समीप पहाड़ी के बीच नला क्षेत्र में वन विभाग ने एनीकट बनवाया था, जिसके क्षतिग्रस्त होने से वन्यजीव पानी के लिए गांवों की ओर आने लगे हैं। माणी सहकारी अध्यक्ष तेजमल मीणा, पूर्व सरपंच कंचन देवी मीणा व ग्रामीणों ने कलेक्टर और वन विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर बरसात के पहले क्षतिग्रस्त एनीकट की मरम्मत कराने तथा पहाड़ी एरिया वन सीमा में वन्यजीवों के लिए पेयजल की व्यवस्था करने की मांग की है। विभागीय अनदेखी के चलते अवैध खनन करने वालों ने एनीकट को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसकी दीवारों के पत्थर निकालकर ले गए। पत्र में प्रशासन से वन सीमा में टांकों का निर्माण कराकर जल्द टैंकरों से पानी की व्यवस्था करने तथा क्षतिग्रस्त एनीकट की मरम्मत कराने की मांग की।

भैरुपुरा ओझा| जंगलों में जलस्रोत सूखने से वन्यजीव गांवों की ओर आने लगे हैं। पानी के लिए रोजड़े खेतों में पहुंचकर इधर-उधर मंडराते रहते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है।

20 गांवों में नहरों का पानी नहीं पहुंचाने से मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: इंद्रगढ़. चाकल बांध की नहरों से किसानों को अभी तक भी नहरी पानी नहीं मिल पाने से किसानों में नाराजगी बनी हुई हैं, जबकि मामले को लेकर पूर्व में विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। इसी मामले को लेकर रविवार को भाजपा ग्रामीण मंडल के अध्यक्ष हिम्मतसिंह हाड़ा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया कि क्षेत्र के 20 गांवों में नहरी पानी सिंचाई के लिए पहुंचाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी तक सिंचाई का पानी पांच गांवों तक पहुंच सका है। पूर्व में विभाग के अधिकारियों के द्वारा जून माह में नहरों का सुदृढ़ीकरण करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कह रहे हैं कि बजट का अभाव है। मुख्यमंत्री से शीघ्र नहरों के सुदृढ़ीकरण करने की मांग की।

जयस्थल. पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से नहर में भर गया पानी।

राताबरड़ा में बंद पड़ा हैंडपंप।

15 दिन से पाइपलाइन क्षतिग्रस्त, नहर में भरा पानी

जयस्थल|
पंचायत के दोताना गांव में जनता जल योजना की पाइपलाइन 15 दिन से क्षतिग्रस्त है। यहां से रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। वहीं ग्रामीणों को पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है। गांव में तीन दिन में नल आते हैं नलों में भी पानी कम दबाव का आ रहा है, जिससे एक घड़ा भरने में आधे घंटे का समय लग रहा है। दूसरी ओर व्यर्थ पानी बहने से नहर भर गई है। पीएचईडी के अधिकारियों को पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने की सूचना देने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पाइपलाइन की मरम्मत कराने की मांग की।

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