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मिश्र खमाज में ठुमरी गाई : छब दिखला जा बांके सांवरिया...

3 वर्ष पहले
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यह एक ऐसी महफिल थी जिसमें रागदारी के साथ ही रसपूर्ण उपशास्त्रीय गायन किया गया और एकल ढोलक वादन की प्रस्तुति भी दी गई। श्री शनैश्चर जयंती संगीत महोत्सव में शुक्रवार को शहर की शास्त्रीय गायिका कल्पना झोकरकर ने गायन और मुंबई के कलाकार नवीन शर्मा ने वादन किया।

ढोलक पर पारंपरिक बंदिशेें बजाई

पहली सभा में कल्पना झोकरकर ने राग मारूबिहाग से शुरुआत की। विलंबित एकताल में बंदिश प्रस्तुत की जिसके बोल थे : शुभदिन आज बना रे बन आए राम सुजान। फिर द्रुत तीन ताल में पार करो मोरी बंदिश भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत की। राग कलावती में द्रुत एकताल में बंदिश तन मन धन तोपे वारूं को तन्मयता से गाया। रस परिवर्तन करते हुए मिश्र खमाज में ठुमरी गाई : छब दिखलाजा बांके संवरिया। दीपचंदी ताल में गाई इस ठुमरी को उन्होंने रसपूर्ण ढंग से गाकर भावों को मार्मिकता से अभिव्यक्त किया। समापन उन्होंने भैरवी में भजन रूप अरूपी रंग रंगीला, बिना अगन उजियारा, साधौ ऐसा रूप तुम्हारा से किया। इसके बाद अनुजा झोकरकर ने कबीर भजन मन लागो मेरो यार फकीरी में। तबले पर पंडित दीपक गरुड़ और हारमोनियम पर डॉ. विवेक बंसोड़ ने संगत की। दूसरी सभा में मुंबई के नवीन शर्मा ने ढोलक वादन किया। तीन ताल में वादन करते हुए पारंपरिक बंदिशें प्रस्तुत की और फिर पिता श्याम शर्मा का छल्ला बजाया। उनके साथ हारमोनियम दीपक खसरावल ने लहरा दिया।

Music Fest

कल्पना झोकरकर

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