सिटी रिपोर्टर | सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा है कि आदिवासी क्षेत्रों में पानी नहीं है, अस्पताल और डॉक्टर नहीं हैं। बिजली और स्कूल नहीं हैं। विकास की योजनाओं के नाम पर आदिवासियों से उनकी जमीन छीनी जा रही है। अब तक तीन करोड़ आदिवासियों को परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित किया गया है। उन्हें बदले में न तो जमीन मिली और ना ही कोई साधन सुविधा मिली। यह बात उन्होंने जाल सभागृह में अभ्यास मंडल की 59वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में शुक्रवार को कही। वे जनजातीय समस्याएं व युवा नेतृत्व विषय पर बोल रहे थे।
आदिवासी इलाकों को संरक्षित करें
उन्होंने कहा कि हमारे देश में 11 करोड़ आदिवासी हैं। इन आदिवासियों का मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा में सरकार के साथ संघर्ष चल रहा है। इन दिनों शिक्षित युवा आदिवासी अपने क्षेत्रों में पत्थर गाड़कर उस पर यह लिखकर बता रहे हैं कि संविधान में आदिवासी समाज को जो अधिकार दिए गए हैं उससे वे आज भी वंचित है। क्या आदिवासी समाज में जनजागरण लाने का यह प्रयास देशद्रोह माना जा सकता है? आदिवासियों के जल जंगल और जमीन को लूटा गया है। इंदौर में तो इतनी दूरी से नर्मदा का पानी आ रहा है, और आप लोगों को मिल रहा है लेकिन धार में नर्मदा से 4 किलोमीटर की दूरी पर जो गांव बसे हैं वे अभी प्यासे हैं।