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गुड्‌डे-गुड़िया के माध्यम से खेल ही खेल में ‘स्पर्श’ के मायने बताएंगे

3 वर्ष पहले
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इंदौर डीबी स्टार

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष माया पांडे ने बताया कि उनकी टीम स्कूलों में जाकर पांच तरीकों से बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में अलर्ट करेंगी। बच्चियों को 5 से 7 मिनट की शॉर्ट फिल्म दिखाई जाएगी। इसके बाद उनसे पूछा जाएगा कि क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? क्या परिजन के अलावा किसी ने इस तरह छुआ है? उन्हें समझाएंगे कि यदि कोई अन्य इस तरह स्पर्श करता है तो वह गलत है। इसकी जानकारी तुरंत अपने पेरेंट या टीचर को दी जाए।

इसके अलावा पॉवर पाइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के जरिेए भी बच्चियों में समझ पैदा करने के प्रयास किए जाएंगे। चित्रों के माध्यम से बच्चों को पांच बॉडी पार्ट के बारे में जानकारी दी जाएगी। बड़े गुड्‌डे और गुड़िया के माध्यम से शारीरिक रचना समझाने के साथ ही स्पर्श के पीछे छिपी भावना से बच्चों को अवगत कराया जाएगा। स्कूलों में टीचर को भी योजना का हिस्सा बनाएंगे, ताकि वह भी जानकारी देते रहें कि बुरी नजर वाले लोगों से बच्चे खुद को किस तरह सुरक्षित रख सकें। उन्होंने बताया कि हम शिक्षा विभाग के अधिकारियों से समन्वय बनाकर इस तरह के लर्निंग-शेयरिंग प्रोग्राम निरंतर चलाते रहेंगे।

पैरेंट मीटिंग में पालकों को समझाएंगे

योजना के तहत बच्चों के पालकों को भी पैरेंट्स मीटिंग में बैड टच से अपने बच्चों को बचाने के तरीके बताए जाएंगे। बताया जाएगा कि अपने बच्चों को 4 साल की उम्र से यह सीख देना शुरू कर दें कि जब दादा-दादी, पापा-मम्मी, दीदी इत्यादि परिजन गले लगाते हैं या चूमते हैं तो वह गुड टच होता है। यदि कोई दूर का परिचित या अजनबी उन्हें गले लगाए या जबरन प्यार जताने की कोशिश करे तो वह बैड टच होता है। बच्चों को बताएं कि जब भी कोई अन्य व्यक्ति आपके शरीर के अंगों को टच करे तो वो बैड टच होता है। अकेले में कोई कपड़े उतारने को कहे तो वह बैड टच माना जाता है। कभी भी किसी के कहने पर उसके साथ कहीं न जाएं जब तक आपके मम्मी-पापा राजी न हों। बच्चों को यह भी शिक्षा देना चाहिए कि कभी उनके साथ कोई गंदी हरकत करने की कोशिश करे तो वहां भागने की कोशिश करें। भाग नहीं पा रहे हों तो जोर से चिल्ला कर मदद मांगनी चाहिए। घर आकर उस घटना के बारे में बिना झिझके बात जरूर करना चाहिए।

स्कूलों में बच्चों को गुड टच-बैड टच बताएंगे

 नए सत्र से स्कूलों में बच्चों को गुड टच-बैड टच के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे खासकर बच्चियां अलर्ट और सेफ रह सकेंगी। वह बुरी नजर वाले लोगों की पहचान कर सकेंगी और टीचर या परिजन को बता सकेंगी। इस प्रोग्राम का उद्देश्य ही यह है कि बच्चों में अच्छे-बुरे स्पर्श की समझ पैदा हो सके। जेके शर्मा, संभागीय संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा

सांकेितक

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