प्रदेश का पहला डिजाइन सेंटर
जीएसआईटीएस में 3 करोड़ की लागत से प्रदेश का पहला डिजाइन सेंटर खुलेगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यहां लगने वाला 55 लाख का थ्रीडी प्रिंटर है। इसकी मदद से मनमाफिक डिजाइन के तकनीकी प्रोडक्ट तैयार किए जा सकेंगे। इसके अलावा चिकित्सकीय उपकरण भी डिजाइन किए जा सकेंगे।
डीबी स्टार. इंदौर
कितन अच्छा हो, कि प्रोडक्ट की जो तस्वीर मन में है, हूबहू वही आंखों के सामने हो। जीएसआईटीएस के सेंटर फॉर इनोवेशन डिजाइन एंड इन्क्यूबेशन (सीआईडीआई) में यह संभव होगा। सीआईडीआई प्रदेश का पहला ऐसा डिजाइन सेंटर होगा, जहां स्टूडेंट और फैकल्टी अपनी कल्पना के अनुरूप तीन डायमेंशन वाले प्रोडक्ट डिजाइन कर सकेंगे।
यहीं उन्हें टेस्ट कर अंतिम रूप दिया जाएगा। सेंटर में बीई-एमई के स्टूडेंट, स्टार्ट अप और मेक इन इंडिया के स्टूडेंट अपने इनोवेशन को आकार दे सकेंगे। फैकल्टी और स्माल एवं मीडियम इंडस्ट्रीज के लोग भी अपनी सोच को हकीकत में बदल सकेंगे।
यह है छोटा 3डी प्रिंटर।
मनमाफिक सोच के प्रोडक्ट बनेंगे
राकेश सक्सेना, डायरेक्टर, जीएसआईटीएस
वर्कशॉप के पास तीन हजार स्क्वेयर फीट जमीन पर सीआईडीआई तैयार हो रहा है। 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन करेंगे। इसमें हर ब्रांच से जुड़ा रिसर्च और डेवलपमेंट का काम हो सकेगा। यहां टेस्टिंग की भी सुविधा मिलेगी। प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप बनाया जा सकेगा। बल्ब, कंडेंसर और बाकी सभी डिवाइस यहां बन सकेंगे।
प्रिंटर से बना हाथ का मॉडल।
जैसा चाहो, बनाकर देगा प्रिंटर
डिजाइन सेंटर में 6 बाय 6 इंच और एक बाय एक फीट के दो थ्रीडी प्रिंटर रहेंगे। बड़े प्रिंटर की कीमत 55 लाख रुपए है। मजे की बात यह है कि यह प्रिंटर मनचाही डिजाइन का प्रोडक्ट बनाकर देगा। इसमें मेटल के एबीएस (मटेरियल) भी इस्तेमाल होंगे। प्रिंटर में अलग-अलग रंग की मेटल डालकर प्रोडक्ट बन सकेंगे।
ऐसे काम करेगा थ्रीडी प्रिंटर
थ्रीडी प्रिंटर डिजाइन सेंटर का सबसे बड़ा आकर्षण हैं। थ्रीडी डिजाइन का प्रोडक्ट लेने के लिए प्रिंटर को तय तापमान पर सेट करना होगा। कम्प्यूटर में तैयार डिजाइन कार्ड में लेकर प्रिंटर में इंसर्ट की जाएगी। प्रिंटर में मटेरियल डालने की सुविधा होगी। जैसे ही प्रिंटर को कमांड दी जाएगी, वह मटेरियल को डिजाइन के हिसाब से प्रोडक्ट में ढालना शुरू कर देगा। सबसे पहले प्रोडक्ट की पहली परत बनेगी। प्रिंटर में लगी प्लेट पर धीरे-धीरे मनमाफिक लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई का प्रोडक्ट बनता जाएगा।
सभी ब्रांच के सॉफ्टवेयर
डीआईसीआई के एक हिस्से में सॉफ्टवेयर पर काम होगा। दूसरे हिस्से में स्टूडेंट उसका प्रैक्टिकल वर्क करेंगे। यहां सभी ब्रांच के सॉफ्टवेयर होंगे। इसके अलावा हाई एंड सर्वर, वर्क स्टेशन, टेस्टिंग और मेजरमेंट इक्विपमेंट और मैकेनिकल टूल्स रहेंगे।
ऐसा होगा सेंटर का सेटअप
डिजाइन सेंटर में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल ब्रांच से जुड़े मॉड्यूल्स होंगे। इनमें डिजाइन किए गए प्रोडक्ट की टेस्टिंग की जाएगी। यदि वह टेस्टिंग में खरा उतर रहा है तो उसे इन्क्यूबेट कर मॉडल के रूप में कंपनी को भेजा जा सकेगा।