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बजट के बावजूद विद्यार्थियों को नए हाई स्कूल और हायर

3 वर्ष पहले
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बजट के बावजूद विद्यार्थियों को नए हाई स्कूल और हायर सेकंडरी भवन नहीं मिल सके। जमीन की उपलब्धता में इतनी देर हो गई कि प्रोजेक्ट में रि-टेंडर की नौबत आ गई है। इनमें तीन स्कूल ऐसे हैं, जिनके भवन अब उनके कैंपस में ही बनेंगे। इस लेटलतीफी से विभाग का बजट तो बढ़ेगा ही, विद्यार्थियों को भी अब नई बिल्डिंग के लिए और इंतजार करना होगा।

इंदौर डीबी स्टार

सरकारी स्कूलों की नई बिल्डिंगों के कई प्रोजेक्ट प्रशासनिक लेटलतीफी में उलझ गए हैं। शिक्षा विभाग ने नए भवनों के लिए बजट मंजूर कर दिया है। पीआईयू ने टेंडर भी लगा दिए हैं, लेकिन मामला जमीन पर अटका है। इनमें तीन प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं, जिनके टेंडर को सालभर से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन उनके लिए अभी तक जमीन अलॉट नहीं हुई है। इसलिए रि-टेंडरिंग का खतरा मंडरा रहा है।

अफसरों का कहना है कि टेंडर के छह महीने में काम शुरू नहीं हो तो ठेकेदार को काम छोड़ने का अधिकार है। यदि ऐसा हुआ तो टेंडर की दोबारा एबीसीडी करना होगी। इससे लागत तो बढ़ेगी ही, प्रोजेक्ट की समय सीमा भी अागे खिसक जाएगी और विद्यार्थियों को अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंतजार करना होगा।

जमीन मिलने पर ही करेंगे टेंडर

जमीन से पहले टेंडर करने पर पीआईयू पर भी सवाल है। इस पर अफसरों का तर्क है कि टेंडर प्रक्रिया दो-तीन महीने लेती है। इसके बाद जमीन के लिए फाइल कलेक्टर के पास जाती है। चिन्हांकन होता है। फिर विभाग जमीन तय करता है। इससे प्रोजेक्ट पांच से छह माह आगे बढ़ जाता है। इसलिए पहले टेंडर कर लिए जाते हैं। शिक्षा विभाग की बिल्डिंगों के लिए जमीन में देरी होने से अब पीआईयू के अफसर जमीन मिलने के बाद ही टेंडर करने की बात कह रहे हैं।

दो साल में दस भवन मंजूर

इंदौर जिले को 2017-18 और 2018-19 में दस हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल मंजूर हुए हैं। हाई स्कूलों में जहां तल मंजिल के भवन बनेंगे, वहीं हायर सेकंडरी में दो मंजिला बिल्डिंग का निर्माण होगा। हर स्कूल में 40 गुणा 40 मीटर के बिल्डिंग स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से जमीन उपलब्ध नहीं हुई है। अफसरों का कहना है कि नाहर खोदरा और चीखली की फाइल एसडीएम से ओके हो गई है। तीन स्कूल कैंपस में ही बनेंगे। इसके अलावा जंबूड़ी हप्सी, आगरा, धन्नड़, भगोरा (महू) सहित चार हायर सेकंडरी स्कूलों में जमीन चाहिए।

विभाग-विद्यार्थी दोनों नुकसान में

स्कूलों की बिल्डिंग के प्रोजेक्ट में लेटलतीफी का असर विभाग और उसके विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। वक्त पर जमीन नहीं मिलने से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है। यानी रि-टेंडरिंग में पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। दूसरी तरफ विद्यार्थियों को प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के कमरों में बैठना पड़ रहा है। जिन स्कूलों के कैंपस में ही भवन बनेंगे, वहां विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

जमीन नहीं होने से तीन स्कूल बिल्डिंग कैंपस में ही बनाने की तैयारी

बजट होने के बाद भी विद्यार्थियों को नहीं मिले नए स्कूल भवन

जंबूड़ी हप्सी में हाई स्कूल के लिए नहीं मिली जमीन।

इंदौर डीबी स्टार

सरकारी स्कूलों की नई बिल्डिंगों के कई प्रोजेक्ट प्रशासनिक लेटलतीफी में उलझ गए हैं। शिक्षा विभाग ने नए भवनों के लिए बजट मंजूर कर दिया है। पीआईयू ने टेंडर भी लगा दिए हैं, लेकिन मामला जमीन पर अटका है। इनमें तीन प्रोजेक्ट तो ऐसे हैं, जिनके टेंडर को सालभर से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन उनके लिए अभी तक जमीन अलॉट नहीं हुई है। इसलिए रि-टेंडरिंग का खतरा मंडरा रहा है।

अफसरों का कहना है कि टेंडर के छह महीने में काम शुरू नहीं हो तो ठेकेदार को काम छोड़ने का अधिकार है। यदि ऐसा हुआ तो टेंडर की दोबारा एबीसीडी करना होगी। इससे लागत तो बढ़ेगी ही, प्रोजेक्ट की समय सीमा भी अागे खिसक जाएगी और विद्यार्थियों को अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इंतजार करना होगा।

जमीन मिलने पर ही करेंगे टेंडर

जमीन से पहले टेंडर करने पर पीआईयू पर भी सवाल है। इस पर अफसरों का तर्क है कि टेंडर प्रक्रिया दो-तीन महीने लेती है। इसके बाद जमीन के लिए फाइल कलेक्टर के पास जाती है। चिन्हांकन होता है। फिर विभाग जमीन तय करता है। इससे प्रोजेक्ट पांच से छह माह आगे बढ़ जाता है। इसलिए पहले टेंडर कर लिए जाते हैं। शिक्षा विभाग की बिल्डिंगों के लिए जमीन में देरी होने से अब पीआईयू के अफसर जमीन मिलने के बाद ही टेंडर करने की बात कह रहे हैं।

दो साल में दस भवन मंजूर

इंदौर जिले को 2017-18 और 2018-19 में दस हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूल मंजूर हुए हैं। हाई स्कूलों में जहां तल मंजिल के भवन बनेंगे, वहीं हायर सेकंडरी में दो मंजिला बिल्डिंग का निर्माण होगा। हर स्कूल में 40 गुणा 40 मीटर के बिल्डिंग स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से जमीन उपलब्ध नहीं हुई है। अफसरों का कहना है कि नाहर खोदरा और चीखली की फाइल एसडीएम से ओके हो गई है। तीन स्कूल कैंपस में ही बनेंगे। इसके अलावा जंबूड़ी हप्सी, आगरा, धन्नड़, भगोरा (महू) सहित चार हायर सेकंडरी स्कूलों में जमीन चाहिए।

विभाग-विद्यार्थी दोनों नुकसान में

स्कूलों की बिल्डिंग के प्रोजेक्ट में लेटलतीफी का असर विभाग और उसके विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। वक्त पर जमीन नहीं मिलने से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है। यानी रि-टेंडरिंग में पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। दूसरी तरफ विद्यार्थियों को प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के कमरों में बैठना पड़ रहा है। जिन स्कूलों के कैंपस में ही भवन बनेंगे, वहां विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

इनमें आई रि-टेंडर की नौबत

पिछले साल हाई स्कूल जंबूड़ी हप्सी, नाहर खोदरा और चीखली में एक-एक करोड़ के नए भवन मंजूर हुए थे। पीआईयू इनके टेंडर लगा चुका है, लेकिन तीनों स्कूल भवन के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं है। पीआईयू के अधिकारियों का कहना है कि जमीन का मामला एक महीने में नहीं सुलझा तो ठेकेदार टेंडर से अपने हाथ खींच सकते हैं। ऐसी सूरत में नए सिरे से टेंडर करना होंगे।

इनके भवन कैंपस में बनेंगे

महूगांव, गौतमपुरा, गांधीनगर और गुरान हायर सेकंडरी स्कूल में भी नई बिल्डिंग बनना है। हर स्कूल के लिए एक करोड़ 75 लाख रुपए का बजट तय है। अफसरों के मुताबिक इनके लिए भी जमीन की मांग की थी, लेकिन पूरी नहीं हो सकी। इसलिए अब इनके परिसर में ही पुराना भवन तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने का फैसला लिया गया है।

स्कूल भवन के लिए चाहिए जमीन

 जंबूड़ी हप्सी हाई स्कूल और आगरा, धन्नड़ और भगोरा में हायर सेकंडरी के लिए बिल्डिंग जमीन चाहिए। नाहरखोदरा और चीखली की फाइल एसडीएम से क्लियर हो गई है। कलेक्टर की मंजूरी बाकी है। तीन भवन कैंपस में ही बनाएंगे। बाकी के लिए प्रशासन से फॉलोअप ले रहे हैं। नरेंद्र जैन, अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक, इंदौर

जल्द उपलब्ध कराएंगे जमीन

 डीईओ से स्कूल बिल्डिंगों की जो सूची मिली थी, उसके हिसाब से उन्हें जमीन उपलब्ध करा दी है। उनका कहना है कि वे संकुलों के कैंपस का ही विस्तार कर वहां भवन बनाएंगे। इसके बावजूद यदि जमीन की जरूरत है तो वहां भी जल्द जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। निशांत वरवड़े, कलेक्टर

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