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वीआईपी का भोजन नहीं चखेंगे सरकारी डॉक्टर

3 वर्ष पहले
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इंदौर/ग्वालियर डीबी स्टार

प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिहाज से उन्हें परोसा जाने वाला भोजन तीन लोगों की कमेटी चखती है। इससे जुड़े प्रमाण पत्र पर उनके हस्ताक्षर लिए जाते हैं। भोजन की डिलेवरी लेने से पहले सुरक्षा प्रभारी हस्ताक्षर करते हैं। ग्वालियर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परोसा जाने वाला भोजन डॉ. आलोक पुरोहित ने चखने से इंकार कर दिया। इसके बाद यह परंपरा बदलने की कवायद शुरू हो गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉक्टर इस परंपरा के विरोध में उतर आए हैं।

राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की सुरक्षा में रहने वाली एसपीजी उनके दौरे पर संबंधित जिले के प्रशासन को लिस्ट सौंपती है। वहां डॉक्टरों की टीम उनके आगमन के पहले व प्रस्थान के एक घंटे बाद तक अस्पताल में बैठती है। इमरजेंसी के लिए वीआईपी के ब्लड ग्रुप वाले दो व्यक्ति व कम से कम दो यूनिट ब्लड के साथ एसपीजी द्वारा सौंपी गई लिस्ट के अनुसार दवाओं की व्यवस्था रहती है। इसके अलावा एक एंबुलेंस में डॉक्टर व स्टाफ की टीम उनके प्रोटोकॉल में रहती है। प्रोटोकॉल में रहने वाले इन्हीं डॉक्टरों की जिम्मेदारी भोजन परोसे जाने से पहले स्वयं खाकर चेक करने की रहती है।

अंग्रेजों के जमाने की है प्रथा

वीआईपी का भोजन चखने की प्रथा अंग्रेजों के जमाने की है। उस समय अंग्रेज शासकों को डर रहता था कि उनके खाने में दुश्मन ने जहर न मिलवा दिया हो। इस डर के कारण वे भोजन को पहले रसोइए को खिलवाते थे। खाने के एक घंटे तक अगर खाने वाले को कुछ नहीं होता था, तभी वे भोजन करते थे। भारत में आजादी के बाद ये व्यवस्था राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के लिए जारी रखी गई है। अब आईएमए के डॉक्टरों का कहना है कि वे गिनी पिग की तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहते हैं। यह व्यवस्था जोखिम भरी होने से ज्यादा अपमानजनक है। यदि खाने में पॉइजन है तो क्या डॉक्टर मरने के लिए है? अब लेटेस्ट तकनीक हैं। तमाम तरह के वैज्ञानिक टेस्ट हैं। ऐसे आधुनिक युग में इस तरह की दकियानूसी व्यवस्था का कोई मतलब नहीं है।

सांकेतिक चित्र

बंद होना चाहिए यह परंपरा

 वीआईपी के भोजन को डॉक्टर या अन्य किसी के चखने वाली परंपरा बंद होना चाहिए। सरकार खुद ऐसी कोई व्यवस्था करे, जिसमें साइंटिफिक तरीके से भोजन की टेस्टिंग की जा सके। निर्मला बुच, पूर्व मुख्य सचिव, मप्र

अमानवीय है यह रिवाज

 वीआईपी ड्यूटी में डॉक्टरों को पहले भोजन चखवाना अमानवीय है। हम इस आदेश का विरोध करते हैं। हमने इस मामले में पीएमओ सहित अन्य अफसरों को पत्र भेजकर इस तरह के आदेश का विरोध किया है। डॉ. रविशंकर डालमिया, अध्यक्ष आईएमए ग्वालियर

यह परंपरा गलत है

 राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को परोसा जाने वाला खाना डॉक्टरों को चखाने की परंपरा गलत है। खाने का परीक्षण करने की कई तकनीक विकसित हो चुकी हैं। वीआईपी की सुरक्षा के लिए इन्हीं तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अनिल विजयवर्गीय, अध्यक्ष आईएमए इंदौर

पहले हमें चखना पड़ता है

 वीआईपी विजिट के दौरान डॉक्टर्स को वीआईपी के भोजन को पहले चखना पड़ता है। मुझे भी कई बार वीआईपी का भोजन चखने की जिम्मेदारी दी गई है। मनीष स्वामी, मुख्य खाद्य निरीक्षक, इंदौर

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