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कैसा हो गर गति बढ़ाते ही सामने स्पीडब्रेकर आ जाए ! यंग इनोवेटर्स ने पुणे में यह प्रयोग किया है

3 वर्ष पहले
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श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय में शुरू हुई नवरचना में देशभर से आए स्टूडेंट्स ने प्रेजेंट किए अपने आइडियाज़
Competition

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

कैसा हो अगर स्पीड ब्रेकर सिर्फ उन गाड़ियों के सामने आएं जो तय स्पीड लिमिट से ज्यादा गति पर गाड़ी चला रहे हों। जैसे ही वे स्पीड बढ़ाएं, ब्रेकर सामने आ जाए। और जो कंट्रोल्ड स्पीड में चल रहे हैं उनकी राह में कोई गतिअवरोध न आए। स्मार्ट इंडिया में ऐसे स्मार्ट स्पीडब्रेकर्स की कल्पना करते हैं यंग माइंड्स... और सिर्फ कल्पना ही नहीं करते, बल्कि उनके पास पूरा प्लान और डिज़ाइन भी है। कुछ शहरों में वे इन्हें इम्प्लिमेंट भी कर रहे हैं। ऐसे कई इनोवेटर्स जुटे हैं शहर में जो तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करते हुए ज़िंदगी को आसान और आरामदायक बनाने के आइडियाज़ लाए हैं। क्लीन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट इंडिया और मेक इन इंडिया साकार होता नज़र आता हैं इनकी सोच में।

वैष्णव यूनिवर्सिटी में शुक्रवार से शुरू हुई नवरचना प्रोजेक्ट कॉम्पीटिशन मेें देशभर से आए स्टूडेंट्स ये आइडियाज़ लाए हैं। वर्किंग मॉडल और डिज़ाइन प्लान से उन्होंने बताया कैसे ये कॉन्सेप्ट एग्ज़ीक्यूट किए जा सकते हैं। जज के तैार पर उपस्थित एक्सपर्ट्स ने सभी आयडियाज़ को वास्तविकता की कसौटियों पर परखा भी। मुख्य अतिथि के रूप में पेरि इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राज लखानी सहित वाइस चांसलर डॉ. उपेंद्र धर मौजूद थे।

हाइड्रोलिक सिस्टम लगा है स्मार्ट स्पीड ब्रेकर में
पुणे के मराठवाड़ा मित्रमंडल इंजीनियरिंग कॉलेज से आए सूरज केशव व टीम ने स्मार्ट स्पीड ब्रेकर डिज़ाइन किए हैं। बकौल सूरज हर सड़क की एक तयश स्पीड लिमिट है। यह ब्रेकर इस स्पीड को बनाए रखने में मदद करेगा। हमने हाइड्रोलिक सिस्टम से ये ब्रेकर तैयार किया है। इसमें मौजूद ऑइल, रिस्पॉन्स टाइम के अनुसार डिस्बर्स हो जाता है और हाइड्रोलिक्स नीचे हो जाते हैं। गाड़ी यदि स्लो होगी तो हाइड्रोलिक्स नीचे हो जाएंगे लेकिन तेज स्पीड में ऑइल को डिस्बर्स होने का टाइम नहीं मिलेगा। इससे ड्राइवर को जर्क लगेगा। ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट न होते हुए वर्किंग मॉडल है। पुणे में कॉलेज की रोड पर काम कर रहा है। हमने पेंटेंट भी फाइल किया है। सेंट्रल गर्वन्मेंट को भी आइडिया भेज रहे हैं।

बिलिंग की लाइन से बचाएगी स्मार्ट कार्ट

चार सेकंड में आपको फ्री करेगा ई-टोल
भोपाल के इंजीनियरिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने टोल बूथ पर होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए ई-टोल प्रोटोटाइप तैयार किया है। वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन, व्हीकल और पर्सनल डिटेल डालने पर क्यूआर कोड मिलेगा। टोल पर लगे स्कैनर के ज़रिए इसे स्कैन करने के बाद एप में मौजूद पेमेंट गेटवे से पेमेंट किया जा सकेगा। वर्तमान में काम कर रहे इस तरह के स्मार्ट सिस्टम के मुकाबले ई-टोल ज्यादा इफेक्टिव है क्योंकि इसमें नेटवर्क की ज़रूरत नहीं होती। इसके अलावा ये पूरा सिस्टम महज़ दो हज़ार रुपए में डेवलप किया गया है इसलिए कॉस्ट इफेक्टिव भी है।

शहर के स्टूडेंट्स ने सुपरमार्केट की बिलिंग लाइन से बचने का सॉल्यूशन दिया। इंटेली शॉपिंग प्रोजेक्ट में उन्होंने कार्ट में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का यूज़ कर उसे स्मार्ट बनाया है। एप्लीकेशन के ज़रिए कार्ट में रखे जाने वाले प्रोडक्ट्स खुद स्कैन हो जाएंगे और उनकी बिलिंग भी होती जाएगी। काउंटर पर पहुंचने से पहले ही एप्लीकेशन में उपलब्ध पेमेंट गेटवे से बिल पेमेंट भी कर सकेंगे। अथर्व मुंगी ने बताया- हम इसे इंदौर के दो सुपर मार्केट में लांच करने जा रहे हैं और जल्द ही हमें पेटेंट भी मिलने वाला है।

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