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बच्चों-बुज़ुर्गों का स्पर्श सहेजने के लिए करा रहे थ्री-डी हैंडकास्टिंग

3 वर्ष पहले
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बच्चों के पैरों और हथेलियों के थ्री डी मोल्ड्स बनवाकर, फ्रेम कर उन्हें घर में सजाते हैं।

प्रिया व्यास | इंदौर

बच्चे का स्पर्श, उसकी नाज़ुक अंगुलियों की, कोमल एड़ियों की बनावट को सहेजकर रखने के लिए लोग उनके हाथों और पैरों के स्कल्पचर्स बनवा रहे हैं। उन्हें फ्रेम करा रहे हैं। इसे हैंड कास्टिंग कहते हैं। इस तरीके से शहर में कई लोग बच्चों के हाथों के थ्री-डी मोल्ड बनवाकर फ्रेम करा रहे हैं। ये सिबलिंग-फ्रेम्स के नाम से प्रचलित हैं। कुछ लोग माता-पिता, ग्रैंडपेरेंट्सके थ्री-डी मोल्ड भी बनवा रहे हैं। इस तरह वे उनका आशीष उनका स्पर्श सहेज कर रख रहे हैं।

इस तरह हाथों का मोल्ड लिया जाता है

बेबी फुटप्रिंट के साथ पूरी फैमिली का हैंडकास्ट भी बनवाए जा रहे

फॉरेन में ये कॉमन ट्रेंड है। इस तरह का काम कर रही आर्टिस्ट ने बताया वहां सिबलिंग फ्रेम्स और फैमिली हैंडकास्ट का चलन ज्यादा है। परिवार में सभी सदस्यों के हाथ एक दूसरे का हाथ थामे हुए। ऐसे स्कल्पचर भी बनवा रहे हैं। वहां से मेट्रोज़ और इंदौर में भी यह कॉन्सेप्ट पॉपुलर हुआ। फ्रेमिंग के साथ पेंडेंट, इयरिंग्स भी बनवाते हैं लोग। इसमें विशेष तरह के लिक्विड में हाथ या पैर को डिप करते हैं। जो मोल्ड मिलता है उसे पांच से छह दिन तक सुखाया जाता है। फिर पेंट की तीन-चार लेयर्स की जाती हैं। गोल्ड, सिल्वर या ब्रास फिनिश देकर इन्हें इटैलियन या कोरियन फ्रेम्स में फ्रेम करते हैं। इन्हें तोहफे में भी दे रहे हैं लोग।

सिलवटें और लकीरें भी...

ये मोल्ड पानी, स्टोन पाउडर और कुछ पदार्थों के घोल से बनाए जाते हैं। जब हथेली या कोई भी चीज़ इस घोल में डालकर निकाल लें तो हूबहू वैसा ही मोल्ड बन जाता है। हाथ की लकीरें और सिलवटें भी बिलकुल वैसी ही मिलती हैं जैसी हैं।

भाई-बहनों के प्रिंट्स साथ बनवाकर सिबलिंग फ्रेम्स बनवा रहे

सिबलिंग फ्रेम

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