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हापुस के साथ बेहद रसीला पायरी आम भी चखिए मैंगो जत्रा में

3 वर्ष पहले
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मैंगो जत्रा में इस बार र|ागिरी और देवगढ़ के हापुस आमों के साथ एक अलग किस्म के आम भी लाए जाएंगे। ये हैं पायरी आम। ये भी महाराष्ट्र के समुद्री इलाकों में ही पैदा होता है, लेकिन पायरी आम हापुस से भी ज्यादा रसीला होता है। इसका उपयोग रस बनाने के लिए करते हैं। वैसे हापुस हो या पायरी, उनकी मिठास का श्रेय समुद्री हवाओं और महाराष्ट्र की जलवायु को जाता है। समुद्र की लवणयुक्त हवा से आम की मिठास बढ़ती है और रंग भी सुर्ख होता है।

18 मई से शुरू होने वाले तीन दिनी मैंगो जत्रा में 20 किसान ऑर्गेनिक तरीके से पकाए गए हापुस आम ला रहे हैं। पहली बार जत्रा में आ रहे दापोली के किसान सुहास विश्वमूर्ति ने बताया - आमों को हम गोबर की खाद और पानी के अलावा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी देते हैं। केमिकल इन्सेक्टिसाइट्स की जगह नीम का उपयोग करते हैं, ताकि सेहत को भी नुकसान न पहुंचे। गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस से हम लगातार हापुस की बेहतर होती क्वालिटी देख पा रहे हैं। यह थोड़ा ज्यादा समय लेता है और ज़रा महंगा भी होता है। डॉ. विश्वास केलकर ने बताया- गौमूत्र, गोबर और न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल कर आम को जरूरी पोषक तत्व देते हैं। परिणामस्वरूप 200 ग्राम से 400ग्राम तक का फल मिलता है।

ओखी के कारण 30 फीसदी कम हुई फसल

आम उत्पादक डॉ. योगेश भागवत बताते हैं- इस वर्ष ओखी तूफान के कारण आम की फसल में 30 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि फिर भी 70 हजार किलो आम हुए हैं। चूंकि इंदौर का तापमान ज्यादा होता है, इसलिए हमने करीब 10 दिन पहले से ही आम उतार लिए, जो पूरे तरह पके नहीं हैं। इन्हें घास की पेटियों में भरकर खुले में रखा है। वहां आने तक ये पूरी तरह पककर तैयार हो जाएंगे। धूप के असर से आम काले न हों इसलिए हम सिर्फ रात में इन्हें ट्रांसपोर्ट करते हैं।

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