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वाटरकूलर की नहीं होती सफाई, परिसर में फैला कचरा

3 वर्ष पहले
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इंदौर डीबी स्टार

कम बजट के छोटे कार्यक्रमों (सेमिनार, सम्मान समारोह, गीत-संगीत, वाद-विवाद इत्यादि) के लिए यह शासकीय हॉल रियासती दामों पर मिलता है। परिसर में दो सामान्य हॉल हैं, जिनमें एग्जिबिशन लगती है। एक एयर कंडीशंड हॉल है, जिसमें इनडोर कार्यक्रम होते हैं। गर्मी के सीजन में महीनेभर से एसी बंद हैं। एयरटाइट होने से हॉल में दर्शकों के पसीने छूटते हैं। देखरेख नहीं होने से हॉल की कुर्सियां टूटने लगी हैं। प्रबंधन ने टूटी कुर्सियां तो हटा लीं, लेकिन उनके सपोर्ट में ठोंकी गई कीलें अब मौजूद हैं, जो दर्शकों को चोटिल करती हैं।

यहां के वाटरकूलर में नियमित पानी नहीं भरा जाता है। इसके खराब हो जाने से पानी ठंडा नहीं रहता है। सफाई नहीं होने स अंदर काई और कीट जमा हो चुका है। हॉल के बाहर कचरा फैला रहता है। गंदे पानी की दो हौज पूरे समय भरी रहती है, जिनमें मच्छरों का लार्वा पनप रहा है। दर्शकों का कहना है कि यदि यही हॉल रहा तो हम यहां किसी प्रोग्राम में नहीं आएंगे। आयोजक भी परेशान हैं, क्योंकि एसी बंद होने से दर्शक बार-बार हॉल से बाहर जाते हैं। यही नहीं, कार्यक्रमों में दर्शकों की संख्या भी घट रही है।

अधीक्षक पर दोहरी जिम्मेदारी

सेंट्रल लायब्रेरी की अधीक्षक विनया काले पर दोहरी जिम्मेदारी है। वह बख्शीबाग स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल की प्रिंसिपल भी हैं। उनके लिए स्कूल में हाजिर रहना भी जरूरी है। इसके चलते वह लायब्रेरी और दुआ हॉल की देखरेख नहीं कर पाती है। लोग कभी-कभार एक दिन के लिए कार्यक्रम कराने आते हैं तो उन्हें समझा दिया जाता है कि आज ही एसी बंद हुआ है। आयोजक भी तकनीकी खामी मानकर चुप रह जाते हैं।

एसी की समस्या कब हल होगी कह नहीं सकते

 हां, यह सही है कि दुआ सभागृह में एसी की समस्या है। हम कई बार रिपेयर करा चुके हैं। अब नए एसी ही लगाना होंगे। हमने इसके लिए कमिश्नर को प्रस्ताव दिया है। उनसे अनुमति मिलते ही नए एसी लगवा देंगे। यह काम कब तक होगा, कहना मुश्किल है। वाटरकूलर की सफाई कराई जाएगी। आयोजक और दर्शक कचरा फैला जाते हैं, जिसे हम समय-समय पर साफ करवाते हैं। विनया काले, अधीक्षक, सेंट्रल लायब्रेरी और दुआ सभागृह

दुआ सभागृह नहीं आएंगे अब

 हम लोग कला-संस्कृति प्रेमी होने के साथ ही नई-नई तकनीक सीखने-समझने में रुचि रखते हैं। इस कारण दुआ सभागार में आए दिन कार्यक्रम अटैंड करते हैं। यहां के एसी बंद होने से बहुत गर्मी लगती है। कुर्सियों की कीलें भी चुभती हैं। पीने को भी शुद्ध और ठंडा पानी नहीं मिलता है। आयोजकों को तो ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वह साल में एक दिन कार्यक्रम कराते हैं, लेकिन हम तो यहां अक्सर आते हैं। हम यहां की अव्यवस्था से तंग आ चुके हैं। अब कार्यक्रम अटैंड नहीं करेंगे। अलका तिवारी, शबनम खान, महेश प्रजापति, कैलाश कौरव, जिग्नेश श्रीवास्तव, सभी दर्शक

सस्ता तो है, लेकिन सुविधा नहीं

प्रीतमलाल सभागृह में हम कार्यक्रम इसलिए कराते हैं, क्योंकि यह शहर के सेंटर पाइंट पर होने के साथ ही सस्ता भी है। कम दर्शक संख्या वाले कम बजट के कार्यक्रमों के लिए यह बेहतर विकल्प है। इन दिनों यहां एसी बंद होने और अन्य सुविधाएं सही ढंग से नहीं मिलने से हमारा कार्यक्रम सफल नहीं हो पाता है। प्रबंधन को चाहिए कि सभागृह का मेंटेनेंस किया जाए, ताकि दर्शकों को असुविधा नहीं हो। आशीष पगारे, हेमंत शुक्ला, राजेश्वरी नायक, सभी आयोजक

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