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सिर्फ नाले वाले भाग में सड़क, बाकी कच्ची, रैलिंग नहीं होेने से रहता है गिरने का डर

3 वर्ष पहले
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इंदौर | वार्ड 75 के पालदा क्षेत्र की शिव-पार्वती कॉलाेनी की यह सड़क सिर्फ नाले वाले हिस्से में पक्की है, पर रैलिंग नहीं। स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में यहां से गुजरना खतरनाक हो जाता है। एम्बुलेंस भी नहीं आती।

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सुरक्षाकर्मियों के पीएफ-वेतन गड़बड़ी की जांच अब तक नहीं

भास्कर संवाददाता | इंदौर

इंदौर प्रीमियर को-आॅपरेटिव (आईपीसी) बैंक के सुरक्षाकर्मियों के प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) और वेतन भुगतान कलेक्टर रेट के अनुसार नहीं कर संबंधित सुरक्षा एजेंसी द्वारा की गई लाखों की गड़बड़ी की शिकायत की जांच सात दिन में की जाना थी, किंतु सहकारिता विभाग जांच का आदेश देकर भूल गया। यही कारण है कि आदेश के एक माह बाद भी न जांच के पते हैं और न ही कार्रवाई के। आईपीसी बैंक व उसकी शाखाओं में 40 से अधिक सुरक्षाकर्मी हैं।

सुरक्षाकर्मियों का अनुबंध जय रणजीत गार्ड एंड सिक्योरिटी सर्विसेस प्रालि के पास है। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के नगर संयोजक जगमोहन वर्मा ने उपायुक्त सहकारिता और बैंक प्रबंधन को सप्रमाण शिकायत की थी कि एजेंसी सुरक्षाकर्मियों को कलेक्टर रेट के अनुसार वेतन भुगतान नहीं कर रही है और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 का पालन नहीं किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसी उनकी भविष्य निधि की राशि भी जमा नहीं कर रही है। वर्मा ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन साल में सुरक्षा एजेंसी ने कर्मचारियों के वेतन और भविष्य निधि राशि का 25 लाख रुपए का गबन किया है। यही नहीं, नियमानुसार कर्मचारी राज्य बीमा निगम अधिनियम के लाभ से भी सुरक्षाकर्मी वंचित हैं। शिकायतकर्ता ने इसमें बैंक की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त सहकारिता काडमू पाटनकर ने 19 अप्रैल को सहकारिता निरीक्षक प्रवीणकुमार नासेरी को जांच के आदेश देते हुए सात दिन में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट विभाग में पेश नहीं की जा सकी है। इस बारे में उपायुक्त पाटनकर से जानना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। जांच अधिकारी निरीक्षक नासेरा ने स्वीकार किया कि अब तक जांच नहीं की जा सकी है।

आईपीसी बैंक का मामला

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