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सोशल और इलेक्ट्रॉनिक-प्रिंट मीडिया तय कर रहा वोट किसे देना है : जोशी

3 वर्ष पहले
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अभ्यास मंडल की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला के अंतिम दिन रविवार को जाल सभागृह में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बात रखी। भूमंडलीकरण समस्या और समाधान विषय पर बोलते हुए डॉ. जोशी ने कई गंभीर मुद्दों का जिक्र किया।

डॉ. जोशी ने प्राकृतिक संपदा के जरूरत से ज्यादा उपयोग को गंभीर चूक बताते हुए कहा कि सोचो जब बच्चे मां का दूध पीने की बजाए खून पीने लगें तो क्या होगा? आज ठीक वैसे ही हम प्रकृति मां का दूध नहीं बल्कि खून पीने लगे हैं। आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम होंगे। डॉ. जाेशी ने देश की जीडीपी को लेकर सरकारों के दावे और चिंता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आपके जीवन पर जीडीपी घटने-बढ़ने पर कभी कोई असर पड़ा? डॉ. जोशी ने कहा कि वर्तमान में सोशल और इलेक्ट्रॉनिक-प्रिंट मीडिया तय कर रहा है कि वोट किसे देना है। युवाओं के लिए यह घातक है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कुल जितनी संपत्ति का हिस्सा 1 फीसदी लोगों के पास है, उतना बचे हुए 99 फीसदी के पास भी नहीं है। इसी कारण असंतुलन बढ़ रहा है। हम मानसिक खुशी के बजाए बाजार की तरफ भाग रहे हैं।

संंबोधित करते मुरलीमनोहर जोशी।

जीडीपी लागू हुई, तब से इसके पीछे भाग रहा हूं

डॉ. जोशी ने कहा कि 4 जनवरी 1934 में पहली बार जीडीपी लागू हुई और 5 जनवरी 1934 को मेरा जन्म हुआ। तब से इसके पीछे भाग रहा हूं। बहुत अध्ययन किया, जिम्मेदारों से सवाल भी किए, लेकिन किसी के पास सही और संतोषजनक जवाब नहीं है कि आखिर जीडीपी से देश या नागरिकों पर क्या फर्क पड़ता है। उन्होंने कहा कि रोजगार, खुशहाली और लोगों में खुश रहने का जीडीपी से कोई लेना-देना नहीं होता। समारोह में मंच अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ और रामेश्वर गुप्ता मौजूद थे। संचालन माला ठाकुर ने किया।

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