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नोटिफिकेशन में प्रावधान, फिर भी अध्यक्ष पद के लिए वकीलों से नहीं मांगे आवेदन

3 वर्ष पहले
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मप्र राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इंदौर सहित प्रदेश की सभी उपभोक्ता फोरम में चेयरमैन की नियुक्ति के लिए सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों (रिटायर्ड डीजे) से आवेदन मांगे हैं और आवेदन जमा करने की तारीख 13 अप्रैल थी। उधर, वकीलों ने सवाल उठाया है कि शासन के नोटिफिकेशन में प्रावधान होने के बावजूद अध्यक्ष पद के लिए आयोग ने वकीलों से आवेदन नहीं बुलवाए। जिला उपभोक्ता फोरम में पहले सिटिंग एडीजे चेयरमैन होते थे। गत वर्ष सितंबर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने चेयरमैन के पद रिटायर्ड जिला जजों से भरने का निर्णय लेकर सभी जिला उपभोक्ता फोरम के चेयरमैन का तबादला अन्य अदालतों में कर दिया। इस निर्णय के चलते राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने रिटायर्ड डीजे से आवेदन बुलवाए थे, किंतु किसी कारणवश नियुक्तियां नहीं होने से सभी जिला उपभोक्ता फोरम चेयरमैन विहीन हो गए और 1 अक्टूबर 2017 से सुनवाई ठप है।

13 अप्रैल तक जमा करना थे आवेदन

चेयरमैन नियुक्ति के लिए लगातार मांग कर रहे एडवोकेट प्रवीण रावल के मुताबिक राज्य उपभोक्ता फोरम ने रिटायर्ड डीजे से प्रदेश के उपभोक्ता फोरम के चेयरमैन पदों के लिए आवेदन बुलवाए और आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 13 अप्रैल थी। वकीलों ने सवाल किया है कि फोरम ने प्रावधान के बावजूद वकीलों से चेयरमैन पद के लिए आवेदन क्यों नहीं बुलवाए। इंदौर बार एसोसिएशन के सचिव गोपाल कचोलिया के मुताबिक मप्र के राजपत्र (असाधारण) 16 जनवरी 2018 में प्रावधान किया गया है कि जिला उपभोक्ता फोरमों के चेयरमैन के 50 प्रतिशत पद वकीलों से भरे जाएंगे, लेकिन आयोग ने वकीलों से आवेदन नहीं बुलवाए। आवेदन केवल रिटायर्ड जजों से ही बुलवाए। कचोलिया ने राज्य शासन को मांग पत्र भेजते हुए आधे पद वकीलों से भरे जाने की मांग की है।

इंदौर की दोनों फोरम में साढ़े छह महीने से सुनवाई ठप, चार हजार केस लंबित

रावल के मुताबिक इंदौर में दो उपभोक्ता फोरम हैं, जिनमें एक फोरम रेसीडेंसी क्षेत्र में आजाद नगर के पास है। इसमें शहरी सीमा से बाहर के यानी जिले के केस सुने जाते हैं। इसमें लगभग 15 सौ केस लंबित हैं, जिनमें लगभग 100 केस नए हैं। दूसरी फोरम नौलखा कॉम्प्लेक्स में है, जिसमें शहरी सीमा के केस सुने जाते हैं। इसमें लगभग ढाई हजार से अधिक केस लंबित हैं, जिनमें पांच सौ केस नए हैं। इस तरह चार हजार केस लंबित हैं, जबकि पूरे प्रदेश में 30 हजार से अधिक केस लंबित हैं।

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