रमजान के पवित्र माह की शुरुअात जुम्मे के साथ हुई। इसके चलते नमाज के लिए मस्जिदों में काफी भीड़ रही। मुस्लिम बस्तियों में दिनभर चहल-पहल रही। इसी के साथ पूरा दिन इबादत के साथ बीता। विशेष नमाज के साथ ही शाम को रोजा इफ्तारी की।
शहर काजी डॉ. इशरत अली ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जमाखोरों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। ये लोग रमजान के ऐनवक्त पर खाद्य सामग्रियों की जमाखोरी कर लेते हैं। इसके कारण फलों और अन्य सामानों के भाव बढ़ जाते हैं। ऐसे में मजबूरन मुस्लिम समाजजनों को इफ्तारी के लिए महंगी खाद्य सामग्रियां खरीदना पड़ती हैं। वहीं, खाद्य विभाग को भी इस दौरान ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो कि सड़े खाद्य पदार्थों को महंगे दामों पर बेच रहे हैं।
तकरीर में बताया रोजे का महत्व
रमजान महीने के शुरू होते ही मुस्लिम बस्तियों में अलग सा माहौल देखने को मिला। अलसुबह सेहरी के बाद पुरुषों ने मस्जिदों में इबादत की। नमाज से पहले इमामों ने तकरीर कर रोजे की फजीलत (महत्व) बताया। शाम को इफ्तारी के पहले मुस्लिम बस्तियों में फलों और पिंड खजूर के साथ ही अन्य खाद्य सामग्रियों की दुकानें सज गईं, जहां समाजजनों ने जमकर खरीदी की। रात में रमजान की दूसरी तरावीह मस्जिदों में हुई।