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यौन उत्पीड़न की शिकार दिव्यांग महिलाओं के लिए शहर में बनेगा शेल्टर होम

3 वर्ष पहले
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अब यौन उत्पीड़न की शिकार दिव्यांग महिलाओं को यहां-वहां नहीं भटकना पड़ेगा। शहर में उनके लिए शेल्टर होम बनाया जा रहा है। इसमें 50 महिलाओं को रखा जा सकेगा। यहां पर उनके रहने-खाने का प्रबंध होगा। इस तरह का प्रदेश का यह पहला शेल्टर होम होगा। शुरुआती अनुमान के मुताबिक निर्माण कार्य पर 50 लाख रुपए खर्च होंगे।

शेल्टर होम मप्र मूक-बधिर पुलिस सहायता केंद्र (थाना तुकोगंज) का एक्सटेंशन पार्ट होगा। इसका संचालन मूक-बधिर विकलांग संस्था, पीपुल फॉर एनिमल इंदौर इकाई एवं विनायक एनिमल बर्ड एंड सिविल डेवलपमेंट एसोसिएशन मिलकर करेंगे। संस्था आनंद सर्विस सोसायटी ने इंदौर-उज्जैन रोड पर ग्राम लिंबोदा माड़ी में शेल्टर होम के लिए 7 हजार वर्गफीट जमीन भी ले ली है। महीनेभर में बाउंड्रीवॉल का काम पूरा हो जाएगा। पहले सिर्फ एक मंजिल ही बनाई जाएगी। जैसे-जैसे जनसहयोग मिलेगा, वैसे-वैसे काम आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल रोटरी क्लब ऑफ इंदौर (संकल्प) के चार्टर प्रेसिडेंट सुधींद्र शर्मा, फार्मा बिजनेस से जुड़े अशोक जायसवाल और मुकेश यादव आगे आए हैं। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र का कहना है कि यह संवेदनशील मामला है। हम पीड़िताओं की प्रशासनिक स्तर पर मदद करते हैं। शेल्टर होम बनने से उन्हें लाभ होगा।

स्वरोजगार से भी जोड़ेंगे

शेल्टर होम में दिव्यांग महिलाओं के व्यवस्थापन की व्यवस्था तो होगी, साथ ही घटना के कारण मानसिक वेदना झेल रही पीड़िताओं की काउंसलिंग भी की जाएगी। उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा, ताकि आत्मनिर्भर बन सकें। अकसर हादसों के बाद उन्हें संभालने वाला कोई नहीं मिलता।

कानूनी लड़ाई होगी आसान

संस्था के ज्ञानेंद्र पुरोहित बताते हैं कि ऐसी पीड़िताओं को कई तरह की परेशानी आती है। एक युवती ने कोर्ट में आरोपियों को चांटा मारकर पहचाना था। परिवार वालों ने उसका खाना-पीना बंद कर दिया। उनका दबाव था कि शिकायत वापस ले। पीड़िताओं को रहने की सुविधा रहेगी, तो लड़ाई लड़ना आसान होगा।

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