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जांच और मौके पर जाए बगैर बनाई सूची, हजारों मतदाताओं के नाम 2 से 5 बार

3 वर्ष पहले
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प्रदेश के अन्य जिलों की तरह इंदौर में भी मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। कहीं एक ही विधानसभा में एक ही मतदाता का नाम पांच जगहों पर दर्ज है, तो कहीं एक ही पोलिंग बूथ में तीन-तीन जगहों पर। अकेले राऊ विधानसभा में 5200 से ज्यादा ऐसे नाम सामने आए हैं, जो मतदाता सूची में दो से लेकर पांच बार दर्ज हैं। मौके पर जाए बगैर और बिना भौतिक परीक्षण के सूची बनाने से ऐसी स्थिति बन रही है।

इन गड़बड़ियों पर अफसरों का कहना है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर 15 मई से 20 जून तक मतदाता सूची पुनरीक्षण का विशेष अभियान चला रहे हैं। इस दौरान मतदाता सूची की सारी विसंगतियां या गड़बड़ियां दूर कर ली जाएंगी। राऊ विधानसभा में विधायक जीतू पटवारी ने प्रशासन को 5200 से ज्यादा ऐसे नामों की सूची सौंपी है। दूसरी तरफ भाजपा नेता भी सूची खंगाल रहे हैं, यानी और भी त्रुटियां सामने आ सकती हैं। हाल ही में हुए उपचुनाव के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी पाए जाने पर जिला कलेक्टरों को हटाए जाने से घबराए अफसर यहां भी सूची बनाने के काम में सतर्कता बरतने का दावा कर रहे हैं, फिर भी गलतियां सामने आ रही हैं।

विसंगतियां : कई मोहल्लों में नाम देखकर लोग भी हैरान

एक विधानसभा में पांच जगह नाम

1. ममता पति मनोज का ही मामला लें। इनका नाम रंगवासा गांव के बूथ के अलावा अहीरखेड़ी, हरिजन मोहल्ला बिजलपुर, पालदा हिम्मतनगर और राजेंद्र नगर की झोपड़पट्टी में मतदाता के रूप में दर्ज है। गौरतलब है कि यह सभी गांव राऊ विधानसभा क्षेत्र में ही आते हैं।

एक पते पर 10 से ज्यादा वोटर तो जांच जरूरी

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार एक ही पते पर यदि 10 से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हों तो उसका भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। एक ही पते पर कई नाम दर्ज होने का मामला हाल ही में मुंगावली उपचुनाव के दौरान सामने आया था। सबसे चर्चित मामला विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के विधानसभा क्षेत्र का है, जहां एक ही मकान में 2000 से ज्यादा मतदाता दर्ज पाए गए थे। हालांकि चुनाव कार्य में लगे लोगों का कहना है कि बहुमंजिला भवनों के मामले में यह समस्या आती है। हमारे पास शिकायतें आई हैं, हम इसकी तस्दीक करेंगे।

सूची अपडेट नहीं : 750 में से 62 मतदाता ही बचे

शहर की विभिन्न विधानसभाओं में कई पोलिंग बूथ ऐसे हैं, जिनके मतदाताओं को विस्थापित कर दिया गया है। मतदाता सूची के हिसाब से वहां मतदाता रहते ही नहीं। जैसे भूरी टेकरी, नैनोद क्षेत्र का मामला ही लें तो यहां कई क्षेत्रों से विस्थापित होकर लोग रहने आए हैं। एक पोलिंग बूथ पर तो करीब 750 दर्ज मतदाताओं में से मौके पर 62 मतदाता ही बचे हैं।

डर यह भी : कम अंतर से हो रही हार-जीत

प्रदेश की दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव हों या ताजा कर्नाटक विधानसभा के चुनाव। कई सीटों पर हार-जीत का अंतर 100 से 1000 के बीच रहा है। ऐेसे में मतदाता सूची में इतने नामों की घट-बढ़ कई उम्मीदवारों का समीकरण बिगाड़ सकती है।

गड़बड़ है : राऊ में कर रहे जांच, हटा रहे नाम

लगातार जांच का काम चल रहा है। राऊ से भी हमने 3000 नाम हटाए हैं। हमारे पास ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसमें बार-बार आ रहे मतदाताओं की पहचान हो जाती है। अंतिम मतदाता सूची जारी करने के पहले सारी विसंगतियां दूर कर ली जाएंगी। -बिहारी सिंह, एसडीएम राऊ

एक ही पोलिंग बूथ पर 2 बार नाम

2. राऊ विधानसभा के बूथ क्रमांक 107 में कई ऐसे मामले मिले हैं, जिसमें एक परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में दो-दो बार शामिल हैं। मसलन-अमरीश पिता रमेश नीमा का नाम एक ही पोलिंग बूथ पर 2 बार सूची में लिखा है।

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