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पंडितों ने कहा- अधिकमास में ही हुआ था गंगा का अवतरण, इसलिए इसी मास में मनाना उचित

3 वर्ष पहले
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अधिकमास में आ रहा गंगा दशहरा (गंगा दशमी) 24 मई को मनाया जाएगा। इस बार गंगा दशहरा 10 में से खास छह योग में मनाया जाएगा। अधिकमास में आने से इसका महत्व और बढ़ गया है। दान-पुण्य, जप-तप का फल और अधिक मिलेगा।

दरअसल, अधिकमास की वजह से इस बार गंगा दशहरे को लेकर असमंजस की स्थिति लोगों में थी कि अधिकमास में 24 मई को या अधिकमास खत्म होने के बाद 22 जून को इसे मनाया जाए। इस मामले में पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार धर्मशास्त्रों के अनुसार अधिकमास में ही गंगा दशहरा मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। 24 मई को ही गंगा दशमी मनाई जाएगी। उन्होंने कहा- मां गंगा का अवतरण जब हुआ था तब भी अधिकमास ही था। अधिकमास में ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। हरिद्वार में भी गंगा दशमी 24 मई को ही मनाई जाएगी।

इन दस योग में है विशेष महत्व

ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि बुधवार। हस्त नक्षत्र। व्यतीपात योग गर करण आनंद योग (बुधवार को यदि हस्त नक्षत्र) कन्या राशि का चंद्रमा वृषभ राशि का सूर्य। इन दस योग में गंगा दशमी मनाने का विशेष महत्व है। पंडितों के अनुसार इस बार ज्येष्ठ मास। शुक्ल पक्ष। दशमी तिथि है। इसके अलावा शाम 7.44 के बाद हस्त नक्षत्र, वृषभ राशि का सूर्य और कन्या राशि का चंद्रमा, गर करण भी रहेगा। इस तरह दस में से सात योग में गंगा दशमी मनाई जाएगी।

मां गंगा का होगा अभिषेक-पूजन और महाआरती

गंगा दशमी पर 24 मई को गंगा बगीची में मां गंगा का अभिषेक, पूजन और महाआरती होगी। ब्रह्ममुहूर्त में मां का अभिषेक होगा। दोपहर में शृंगार और शाम को महाआरती की जाएगी।

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