शासन से मंजूरी नहीं, लोकायुक्त पुलिस के 250 प्रकरण अटके
राज्य लोकायुक्त पुलिस भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी संबंधित ढाई सौ मामलों में राज्य सरकार द्वारा अनुमति नहीं मिलने से अदालतों में चार्जशीट पेश नहीं कर पा रही है। इनमें 40 से अधिक मामले लोकायुक्त पुलिस इंदौर के हैं, जिनके चालान तो तैयार है किंतु अनुमति के अभाव में मामले कोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। भ्रष्टाचार संबंधी ये मामले प्रदेश के आईएएस अफसरों से लेकर पटवारी और भृत्यों तक से जुड़े हुए हैं। भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरण दर्ज कर पूरी छानबीन के बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा चालान पेश किया जाता है। सरकारी कर्मचारी या अफसर के खिलाफ चालान राज्य सरकार द्वारा अनुमति (अभियोजन स्वीकृति) के बाद ही अदालत में पेश किए जा सकते हैं। अनुमति नहीं मिलने के कारण पिछले चार-पांच साल में राज्यभर में ऐसे प्रकरणों की संख्या 250 तक पहुंच गई है। जानकारों के मुताबिक लोकायुक्त में दर्ज प्रकरणों में राजस्व विभाग पहले नंबर पर है। लोकायुक्त संगठन द्वारा चार सालों से लगातार अभियोजन स्वीकृति के लिए सामान्य प्रशासन विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। मंजूरी तो दूर विभाग की ओर से जवाब तक नहीं दिया जा रहा है।
नौ साल से लटका है निगम इंजीनियर का केस
लोकायुक्त पुलिस इंदौर के 40 से अधिक मामलों में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। इनमें नगर निगम इंदौर के इंजीनियर दिलीपसिंह चौहान के खिलाफ केस में नौ साल से अनुमति नहीं मिल सकी है।
एक आईएएस पर 25 मुकदमे
लोकायुक्त में एक आईएएस पर 25 प्रकरण दर्ज हैं। उन पर उज्जैन संभाग आयुक्त रहते हुए जमीनों के फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। वे वर्तमान में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पदस्थ हैं। लोकायुक्त ने 2014 में अभियोजन मंजूरी के लिए फाइल भेजी थी, किंतु अनुमति नहीं मिली। प्रकरणों में तीन तहसीलदार व 24 पटवारी आरोपी हैं।
केस हैं लंबित
राजस्व विभाग 77
पंचायत, ग्रामीण विकास 29
अन्य निकाय 31
सामान्य प्रशासन 27
सहकारिता 25
वन विभाग 12
नगरीय प्रशासन 11
स्कूल शिक्षा विभाग 09
आदिम जाति कल्याण विभाग 05
वाणिज्यिक कर विभाग 04
सरकारी वकील की नियुक्ति पर गृह और विधि विभाग में फैसला नहीं, सुनवाई प्रभावित
इंदौर | जिला कोर्ट के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार अधिनियम) में करीब साढ़े तीन माह से लोकायुक्त पुलिस के सरकारी वकील की नियुक्ति नहीं हुई है। इस वजह से प्रकरणों की सुनवाई प्रभावित हो रही है। नियुक्ति में देरी का कारण विधि व गृह विभाग में फाइल अटकना है।
जिला न्यायालयों में एक-एक स्पेशल कोर्ट होती है जो लोकायुक्त पुलिस और ईओडब्ल्यू के भ्रष्टाचार संबंधी प्रकरणों की सुनवाई करती है। इनमें लोकायुक्त संगठन के प्रकरणों की पैरवी लिए जिला लोक अभियोजक स्तर के सरकारी वकील की नियुक्ति राज्य शासन द्वारा की जाती है। विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार अधिनियम) इंदौर में लोकायुक्त पुलिस की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजन अधिकारी एके सोनी दिसंबर 2017 में रिटायर हो गए, तभी से उनके स्थान पर नियुक्ति नहीं की गई। जनवरी में लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी ने राज्य लोकायुक्त संगठन को पत्र लिख नियुक्ति की मांग की थी। उसके बाद स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार अधिनियम) ने भी संचालक लोक अभियोजन को सरकारी वकील जल्द नियुक्त करने के लिए पत्र लिखा था, जिसके बाद राज्य अभियोजन के संचालक ने सरकारी वकील के नाम का प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया था।
भेजते हैं सरकारी वकील
एडवोकेट प्रवीण रावल व एडवोकेट संजय जैन का कहना है संचालक अभियोजन ने प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया। विधि विभाग प्रस्ताव गृह विभाग को भेजेगा जिसके बाद नियुक्ति होगी। एडवोकेट रावल के मुताबिक विशेष न्यायालय में लोकायुक्त पुलिस के सौ से ज्यादा प्रकरण विचाराधीन हैं। औसतन रोज 10 प्रकरणों की सुनवाई प्रभावित हो रही है क्योंकि अदालत द्वारा अभियोजन कार्यालय को सूचना भेजना होती है, तब वे पैरवी के लिए आते हैं।