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24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा शुरू, कलशयात्रा निकली

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता|इंदौर/िशप्रा

बायपास स्थित वनखंडी हनुमान मंदिर के पास 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा शनिवार से शुरू हुई। शोभायात्रा से अनुष्ठान की शुरुआत हुई। इसमें 1100 मातृशक्तियां मंगल कलश लिए शामिल हुईं।

यात्रा में आगे बैंड-बाजों के साथ भजन गाए जा रहे थे, वहीं पीछे महिलाएं चल रही थीं। अखाड़ों के कलाकार कला का प्रदर्शन करते चल रहे थे। विभिन्न मंचों से स्वागत किया गया। कार्यक्रम स्थल से निकली यात्रा शिप्रा-नर्मदा संगम तट पर पहुंची, जहां कलशों में जल भरा गया। यज्ञ स्थल मां गायत्री की आरती की गई। दोपहर 3.30 बजे से प्रज्ञा पुराण का वाचन प्रारंभ हुआ। इसमें कहा गया आज का इंसान 33 कोटि देवताओं की पूजा करते-करते पुजारी बना हुआ है, लेकिन आत्मपूजन भूल चुका है। अगर मनुष्य स्वयं का पुजारी हो जाए तो दुनिया की सारी अराजकता समाप्त हो जाएगी। दुनिया को छलने वाला व्यक्ति स्वयं ही स्वयं द्वारा हजार गुना छला जा रहा है।

आयोजन समिति से जुड़े शंकरलाल शर्मा, सिद्धार्थ सराठे ने बताया 15 अप्रैल को सुबह यज्ञ के साथ देवपूजन व दोपहर में प्रज्ञा पुराण का वाचन, 16 अप्रैल को सोमवती अमावस्या के अवसर पर गुरु दीक्षा के साथ अन्य संस्कार भी होंगे। शाम को दीप महायज्ञ तथा 17 अप्रैल को यज्ञ की पूर्णाहुति होगी।

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