अंगदान पर डॉक्टर बोले- काउंसलिंग और दबाव में फर्क होना चाहिए
अंगदान को लेकर कुछ ही समय में देशभर में अलग पहचान बनाने वाले इंदौर में हाल ही में जीवित मरीज को ब्रेनडेड बताकर उसके परिजनों से अंगदान के लिए दबाव बनाने का मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। यहां डॉक्टर्स अपना मत रख रहे हैं। उनका कहना है कि अंगदान एक अनुकरणीय पहल है। यहां तक पहुंचने के लिए हर किसी ने बहुत मेहनत की है। इसलिए किसी भी तरह की भ्रामक सूचना से इसे नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। वहीं कुछ का यह भी कहना है कि काउंसलिंग और दबाव में फर्क होना चाहिए। इसलिए इसकी जांच की जाना चाहिए।
ह्यूमन आॅर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट के तहत मेडिकल कॉलेज के डीन अंगदान संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। हाल ही में एमवायएच में 19 वर्षीय जीवित मरीज को ब्रेन डेड बताकर एक एनजीओ ने उसके परिजनों पर दबाव बनाया था। इसमें दोनों ओर से पक्ष रखे गए। एक तरफ बताया जा रहा है कि उस दिन मौजूद न्यूरो सर्जन आॅर्गन रिट्राइवल कमेटी में है ही नहीं। वे इसके लिए अधिकृत नहीं हैं तो फिर उनसे ब्रेन डेड के बारे में एनजीओ द्वारा बीएसडी के बारे में कहना संभव नहीं है। डॉक्टर ने खुद परिजन से अंगदान का पूछा। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल से रात को उनको कॉल गया था। मरीज जीवित था और वे उसे बचाने की कोशिश ही कर रहे थे।
गाइडलाइन के अनुसार हो जांच
गाइड लाइन के अनुसार उचित व निष्पक्ष जांच होना चाहिए। अंगदान एक अनुकरणीय पहल है। लोगों के मन में इसे लेकर कोई भ्रम या भ्रांति नहीं उपजना चाहिए। -डॉ. अपूर्व पौराणिक, न्यूरोफिजिशियन एमवायएच
यह आम चर्चा है कि अंगदान के लिए परिजन पर दबाव बनाया जाता है। काउंसलिंग और दबाव में फर्क होना चाहिए। ऐसा वाकया अब न हो, इसलिए इसकी जांच हो चाहिए। -डॉ. संजय लोढे, पूर्व अध्यक्ष आईएमए
परिजन की इच्छा ही अंतिम फैसला होता है। सभी अस्पतालों में इस कार्य के लिए एक समिति बनाई गई है। -डॉ. राहुल रोकड़े, मीडिया प्रभारी एमजीएम मेडिकल कॉलेज