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कल परशुराम जयंती पर निकलने वाली शोभायात्रा में आरक्षण संबंधी झांकी शामिल करने को लेकर ब्राह्मण समाज में मतभेद

3 वर्ष पहले
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एक धड़े ने कहा- आरक्षण में सुधार की मांग पर बड़ा वर्ग हमारे साथ, दूसरा धड़ा- इससे गलत संदेश जाएगा

भास्कर संवाददाता | इंदौर

भगवान परशुराम प्रकटोत्सव पर 18 अप्रैल को सर्वब्राह्मण समाज बड़ा गणपति से राजबाड़ा तक शोभायात्रा निकालेगा। इसमें आरक्षण को लेकर एक झांकी भी निकालने की तैयारी है। यात्रा में आरक्षण के मुद्दे को शामिल करने को लेकर समाज का एक धड़ा समर्थन में है तो दूसरा गुट नाराज।

दरअसल, सर्वब्राह्मण युवा परिषद द्वारा शोभायात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें आरक्षण के मुद्दे को यात्रा में शामिल करने का निर्णय लिया। युवा परिषद ने समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं के साथ मिलकर तय किया कि इस बार आरक्षण सुधार की मांग को लेकर ही यात्रा निकाली जाए। इसके लिए परिषद ने तय भी कर लिया। अब यात्रा के दो दिन पहले इसे लेकर एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। हालांकि यह तय नहीं है कि झांकी का स्वरूप किया रहेगा।

समर्थन : आरक्षण सुधार को लेकर ही निकालेंगे यात्रा, हम समाज की बात रखेंगे

सर्व ब्राह्मण समाज के सचिव विकास अवस्थी और कोषाध्यक्ष लालजी तिवारी ने बताया इस बार की परंपरागत शोभायात्रा आरक्षण सुधार की मांग को लेकर ही निकाली जाएगी। समाज का बड़ा वर्ग हमारे साथ है। कुछ लोग नहीं चाहते कि हम इसे शामिल करें। उन्होंने कहा- ब्राह्मण समाज सदैव ही सबके कल्याण की कामना करते आया है, इसलिए हम गरीब दलित को आरक्षण देने के पक्षधर हैं, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र से आरक्षण पूर्णत: समाप्त किया जाना चाहिए। गरीब दलित विद्यार्थियों को शिक्षित-दीक्षित बनाने की उच्चतम सुविधाएं नि:शुल्क देना चाहिए। अति गरीब सवर्णों को भी शासकीय नौकरियों में आरक्षण दिया जाना चाहिए। हम आरक्षण सुधार को लेकर ही यात्रा निकालेंगे। एक वाहन में सभी मांगें रखेंगे, दूसरा झांकी निकालने की भी तैयारी है।

विरोध : यात्रा का पारंपरिक स्वरूप बरकरार रहना चाहिए

सर्वब्राह्मण युवा संगठन के संयोजक चंद्रमोहन दुबे का कहना है भगवान परशुराम सभी के आराध्य हैं। यात्रा का जो पारंपरिक स्वरूप हमेशा रहता है, वही रहना चाहिए। इसमें आरक्षण सुधार को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इससे गलत संदेश जाएगा। ब्राह्मण समाज ने सदैव हिंदू समाज को एकजुट रखा है। जो परिस्थितियां पिछले दिनों में बनी हैं, उसके बाद अब हिंदू समाज को एकजुट होने की जरूरत है। आरक्षण सुधार की मांग परंपरागत यात्रा में शामिल नहीं हो। हम समाज की बैठक करेंगे। मंगलवार तक इस पूरे मामले को सुलझा लिया जाएगा।

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