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हमारे पूर्वजों की सोच वैज्ञानिक थी, उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए : वागधीश
इंदौर| अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत बुधवार से हुई। यह 13 जून तक रहेगा। इसी के साथ शहरभर में भागवत पारायण, कथा, व अन्य अनुष्ठान भी शुरू हो गए। यशवंतगंज स्थित गोवर्धननाथ मंदिर प्रांगण में श्रीकृष्ण वल्लभ स्वरूपामृत सुधारसपान महोत्सव की शुरुआत हुई। इसमें गोस्वामी वागधीश बाबा ने
कहा- मनुष्य पर धर्म का बंधन जरूरी है। हमारे पूर्वजों की सोच काफी वैज्ञानिक थी, इसलिए हमें उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। आयोजन गोस्वामिनी रुक्मिणी बहू, द्वितीय पीठाधीश्वर गोस्वामी कल्याणराय महाराज के सान्निध्य और भागवत नित्य पाठ मंडल व वैष्णव मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में हो रहा है। मंडल के मनोज नागर ने बताया महोत्सव में भजन मंडली द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी गई। व्यासपीठ का पूजन कनु भाई तलाटी, जानकीलाल नीमा आदि ने किया।
गोवर्धननाथ मंदिर में शुरू हुए महोत्सव में उपस्थित श्रद्धालु।
स्नेहलतागंज में भागवत कथा शुरू
हरि निवास परिसर स्नेहलतागंज में भागवत कथा शुरू हुई। इससे पूर्व सुबह जैन मंदिर के पास से भागवत पुराण के साथ कलश यात्रा निकाली गई। आयोजन समिति के महेश विजपुरिया ने बताया यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश और भगवा ध्वज लिए चलीं। यात्रा स्नेहलतागंज से भंडारी मिल होते हुए कथा स्थल पहुंची। इसके बाद शुरू हुई कथा में पं. संतोष भार्गव ने महात्म्य का प्रसंग सुनाया। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से होगी। उधर, वल्लभ नगर स्थित दुबे का बगीचा में चल रही भागवत कथा में पं. देवकीनंदन ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया। ओमप्रकाश जायसवाल ने बताया अंत में महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया।
जानकीनाथ मंदिर में रामायण पारायण करते ब्राह्मण।
गौराकुंड में रामायण पारायण
श्री माहेश्वरी पंचायती ट्रस्ट द्वारा आयोजित 30 दिनी अनुष्ठान की शुरुआत बुधवार को 108 ब्राह्मणों के सान्निध्य में गौराकुंड चौराहा स्थित जानकीनाथ मंदिर में हुई। श्रीमद् भागवत कथा, रामायण पारायण, पांच दिनी लक्ष्मीनारायण महायज्ञ आदि होंगे। उधर, विजय मारुति हनुमान मंदिर (नवर| बाग) में अखंड रामायण पाठ की शुरुआत कलश यात्रा से हुई। मानस मंदिर धार्मिक व पारमार्थिक न्यास के संभागीय अध्यक्ष महंत मंगलदास महाराज ने बताया अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की गई। हवन-पूजन और यज्ञ किया गया। पं. अमित गौड़ के सान्निध्य में विद्वानों ने अखंड रामायण पाठ की शुरुआत की।