पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • अधूरी प्लानिंग से बारिश में आफत

अधूरी प्लानिंग से बारिश में आफत

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इंदौर डीबी स्टार

इंदौर-देवास बायपास की सर्विस रोड पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) 87 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य कर रही है। इसमें सड़क बनाने, स्ट्रीट लाइट लगाने के साथ ही नालियों को ढंकने का काम भी चल रहा है। मांगलिया से राऊ के बीच में दोनों तरफ 32 किलोमीटर की नालियों को बारिश से पहले ढंका जाना है। पहले यहां सड़क के समानांतर सीमेंट कांक्रीट के ढक्कन लगाए गए।

अब नालियों के ऊपर कांक्रीट के स्लैब बनाए जा रहे हैं। यह स्लैब सड़क से करीब डेढ़ फीट ऊंचे बन रहे हैं। यानी बारिश का पानी बजाय नाली में जाने के सड़क पर ही जमा होगा। 16 किलोमीटर की सड़क के दोनों तरफ बनी नालियों की आधी-अधूरी प्लानिंग के चलते इनके मुहाने बंद हैं। यानी जहां से नालियां शुरू और खत्म होती हैं वहां इनके पानी की निकासी नहीं है। इस कारण बारिश का सारा पानी अंडरपास या अन्य स्थानों पर जहां कट है, जमा होगा। यानी करोड़ों रुपए की लागत से किए जा रहे विकास कार्यों पर बारिश में पानी फिर सकता है। यह खामियां आम आदमी को भी नजर आ रही है पर पता नहीं क्यों एनएचएआई के अफसर इस पर गौर नहीं कर रहे हैं। अपडाउन करने वाले लोगों का कहना है कि इंजीनियर से लेकर ठेकेदार भी आंख बंद कर काम किए जा रहे हैं। खामियों पर किसी का ध्यान नहीं है।

हादसों के बाद ढंकने का निर्णय

देवास बायपास की सर्विस रोड के किनारे बनी पांच फीट चौड़ी नालियों की वजह से कई हादसे हो चुके हैं। यहां स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात के समय वाहन चालक नालियों में गिर जाते हैं। बारिश में जब नाली से लेकर सड़क तक पानी जमा हो जाता है तो वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता है कि कहां तक सड़क है और कहां से नाली शुरू होती है। यह मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहा तो सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने एनएचएआई अफसरों को नालियां कवर्ड करने के निर्देश दिए। यहां सड़क के डामरीकरण के साथ ही नालियों पर स्लैब डालने का काम भी तेजी से चल रहा है। हालांकि, स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि सबसे पहले बिजली का प्रबंध किया जाना चाहिए।

टूटने लगी हैं स्लैब

इन दिनों बेस्ट प्राइज के सामने वाली सर्विस रोड पर नालियों को कवर्ड करने के लिए सीमेंट कांक्रीट की स्लैब डाली जा रही है। काम की गति को देखकर लगता नहीं कि बारिश के पहले नालियां ढंक सकेंगी। निर्माण कार्य भी इतने घटिया स्तर का हो रहा है कि बनने के महीनेभर के अंदर ही यहां की स्लैब धंसने लगी हैं। कई स्थानों पर सीमेंट की स्लैब टूट चुकी हैं। अंडरपास के मुहानों को मजबूती देने के लिए जो सीमेंटीकरण किया गया था उसका भी क्षरण शुरू हो चुका है। इसके अलावा अधिकांश ढक्कन गायब हो चुके हैं।

सर्विस रोड पर जमा होगा पानी, फंसेंगे वाहन

महीनेभर में ही ध्वस्त।

दीवार का भी क्षरण।

इंदौर डीबी स्टार

इंदौर-देवास बायपास की सर्विस रोड पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) 87 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य कर रही है। इसमें सड़क बनाने, स्ट्रीट लाइट लगाने के साथ ही नालियों को ढंकने का काम भी चल रहा है। मांगलिया से राऊ के बीच में दोनों तरफ 32 किलोमीटर की नालियों को बारिश से पहले ढंका जाना है। पहले यहां सड़क के समानांतर सीमेंट कांक्रीट के ढक्कन लगाए गए।

अब नालियों के ऊपर कांक्रीट के स्लैब बनाए जा रहे हैं। यह स्लैब सड़क से करीब डेढ़ फीट ऊंचे बन रहे हैं। यानी बारिश का पानी बजाय नाली में जाने के सड़क पर ही जमा होगा। 16 किलोमीटर की सड़क के दोनों तरफ बनी नालियों की आधी-अधूरी प्लानिंग के चलते इनके मुहाने बंद हैं। यानी जहां से नालियां शुरू और खत्म होती हैं वहां इनके पानी की निकासी नहीं है। इस कारण बारिश का सारा पानी अंडरपास या अन्य स्थानों पर जहां कट है, जमा होगा। यानी करोड़ों रुपए की लागत से किए जा रहे विकास कार्यों पर बारिश में पानी फिर सकता है। यह खामियां आम आदमी को भी नजर आ रही है पर पता नहीं क्यों एनएचएआई के अफसर इस पर गौर नहीं कर रहे हैं। अपडाउन करने वाले लोगों का कहना है कि इंजीनियर से लेकर ठेकेदार भी आंख बंद कर काम किए जा रहे हैं। खामियों पर किसी का ध्यान नहीं है।

हादसों के बाद ढंकने का निर्णय

देवास बायपास की सर्विस रोड के किनारे बनी पांच फीट चौड़ी नालियों की वजह से कई हादसे हो चुके हैं। यहां स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात के समय वाहन चालक नालियों में गिर जाते हैं। बारिश में जब नाली से लेकर सड़क तक पानी जमा हो जाता है तो वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता है कि कहां तक सड़क है और कहां से नाली शुरू होती है। यह मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में रहा तो सांसद और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने एनएचएआई अफसरों को नालियां कवर्ड करने के निर्देश दिए। यहां सड़क के डामरीकरण के साथ ही नालियों पर स्लैब डालने का काम भी तेजी से चल रहा है। हालांकि, स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू नहीं हो सका है। लोगों का कहना है कि सबसे पहले बिजली का प्रबंध किया जाना चाहिए।

टूटने लगी हैं स्लैब

इन दिनों बेस्ट प्राइज के सामने वाली सर्विस रोड पर नालियों को कवर्ड करने के लिए सीमेंट कांक्रीट की स्लैब डाली जा रही है। काम की गति को देखकर लगता नहीं कि बारिश के पहले नालियां ढंक सकेंगी। निर्माण कार्य भी इतने घटिया स्तर का हो रहा है कि बनने के महीनेभर के अंदर ही यहां की स्लैब धंसने लगी हैं। कई स्थानों पर सीमेंट की स्लैब टूट चुकी हैं। अंडरपास के मुहानों को मजबूती देने के लिए जो सीमेंटीकरण किया गया था उसका भी क्षरण शुरू हो चुका है। इसके अलावा अधिकांश ढक्कन गायब हो चुके हैं।

सैकड़ों ढक्कन गायब।

सड़क से डेढ़ फीट ऊंचे ढक्कन होने से सड़क पर ही जमा होगा बरसात का पानी

एक्सपर्ट व्यू

बारिश में भरेगा पानी, लगेगा जाम

सिविल इंजीनियर अशोक कुमार देवड़ा का कहना है कि सर्विस रोड को लेकर इंजीनियरों ने जो प्लानिंग की है वह ठीक नहीं है। ऐसा कहीं भी नहीं होता है कि नालियों के पानी की निकासी नहीं दी जाए। उनका दावा है कि एनएचएआई की आधी-अधूरी प्लानिंग के चलते बारिश में सर्विस रोड पर पानी जमा होगा। नालियों पर डाले जा रहे स्लैब की ऊंचाई अधिक होने के कारण पानी सड़क पर ही भराता रहेगा। अंडरपास के आसपास नालियों के पानी की निकासी नहीं दी गई है। इससे इन स्थानों पर सबसे ज्यादा पानी भरेगा। पानी भराने के कारण छोटे वाहनों का निकलना दूभर होगा और अक्सर जाम लगने की नौबत आएगी। जलजमाव की स्थिति में वाहन नालियों तक जा सकते हैं। ऐसे में कमजोर नालियां ध्वस्त हो जाएंगी और वाहन फंस जाएंगे।

बनने के महीनेभर बाद ही ध्वस्त होने लगे सीमेंट कांक्रीट के ढक्कन

सीधी बात रवींद्र गुप्ता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

ठेकेदार को सभी खामियां दूर करने के निर्देश देंगे

देवास बायपास पर कितने किलोमीटर में नालियों को कवर्ड किया जा रहा है?

मांगलिया से राऊ के बीच में दोनों तरफ 16-16 किलोमीटर की नालियों को ढंका जाना है। कोशिश है यह काम बारिश तक पूर्ण हो जाए।

32 किलोमीटर के पूरे क्षेत्र में कहीं भी पानी की निकासी नहीं है? हर जगह मुहानों पर आकर नाली बंद हो रही है?

नालियों के बीच में कहीं-कहीं पाइप डालकर सड़क के दूसरे छोर पर पानी की निकासी दी है। वैसे ठेकेदार ने इतनी बड़ी चूक कैसे की, उन्हें यह खामी दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे।

जहां पाइप डाले थे वो भी टूट चुके हैं और मलबा भरा होने से निकासी बंद है?

संबंधित ठेकेदार को बोलकर इन निकासी द्वारों को भी क्लियर करवाएंगे।

नालियों पर सड़क से ऊंची स्लैब डाली जा रही है, इससे पानी सड़क पर ही जमा होगा?

सड़क से ऊंची स्लैब इसलिए बनाई जा रही है ताकि वाहन चालक नाली वाले हिस्से पर नहीं पहुंच सके। वैसे हम स्लैब में जगह-जगह होल करवा देंगे, ताकि पानी को बहने की जगह मिल सके।

स्लैब की गुणवत्ता इतनी खराब है कि महीनेभर में ही टूटने लगी हैं?

हो सकता है वाहनों के कारण स्लैब धराशायी हुई हो। फिर भी हम निर्माण स्थल पर जाकर गुणवत्ता चेक करेंगे।

पहले जहां सीमेंट के ढक्कन लगाए थे उनमें से अधिकांश गायब हो चुके हैं?

नाली की सफाई के लिए ढक्कन हटाए गए होंगे। कुछ जगहों पर वाहनों के कारण भी टूट गए हैं। वैसे हम फिर से नालियों पर ढक्कन लगवा देंगे।

खबरें और भी हैं...