यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में तीन सिंधी नाटकों का मंचन किया गया। ये हास्य नाटक अपनी सहजता और रोचकता के साथ ज़िंदगी के सबक दे गए।
इन नाटकों में एक नाटक ज़िंदगी जा रंग, दूसरा न्याणी नाहे निमाणी और तीसरा नाटक अंगदान जीवन एक आशा मंचित किए गए। ये तीनों ही नाटक निर्देशक अशोक बुलानी के निर्देशन में खेले गए। पहला नाटक ज़िंदगी जा रंग सहज और चुटीले हास्य के कारण प्रभाव छोड़ गया। इसमें यह बताया गया था कि ज़िंदगी में हमेशा ही शॉर्ट कट किस तरह से नुकसानदायक हो सकता है। इसमें कलाकारों ने परिस्थितिजन्य हास्य में सहज ही अभिनय किया। अंगदान ज़िंदगी एक आशा नाटक में मार्मिकता से बताया गया कि आज के समय में अंगदान का कितना महत्व है।