जिला अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं। इनमें से दो सालों से खराब पड़ी हैं, जबकि रोजाना सैकड़ों मरीजों को इनकी जरूरत पड़ती है। कई मरीजों को रोज एमवायएच रैफर किया जाता है। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को घर से लाने और छोड़ने का भी प्रावधान है। ऐसे में समझा जा सकता है कि मरीजों की कितनी फजीहत होती होगी।
सिविल सर्जन डॉ. एमएस मंडलोई ने बताया कि 15 साल पुरानी एंबुलेंस हैं। इन्हें कंडम घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हमने नई एंबुलेंस के लिए भी शासन को पत्र लिखा है, लेकिन 108 एंबुलेंस होने के कारण अभी नई गाड़ियां स्वीकृत नहीं की जा रही हैं। परेशानी यह भी है कि स्टाफ के लिए भी कोई गाड़ी नहीं है, क्योंकि ज्यादातर स्टाफ दूर रहता है। रात के समय आने-जाने में समय लगता है।
मरीजों को भेजते हैं ऑटो से
एक एंबुलेंस जो चालू हालत में है, वह भी पाॅवर ग्रिड काॅर्पोरेशन ने दान की है। अस्पताल की स्थिति यह है कि यहां एमएलसी केस बनाए जाते हैं, लेकिन आईसीयू और इलाज की सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को एमवायएच रैफर किया जाता है। ऐसे में समय पर एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं रहती। कई बार मरीज को ऑटो से दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है।