भारी माल और यात्री वाहनों को लेकर 1 जुलाई से देशभर में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत भारी माल और यात्री वाहनों को चलाने के लिए ड्राइवरों को लाइसेंस तभी मिलेगा, जब वे ईंधन बचाने (फ्यूल एफिशिएंसी) का टेस्ट पास कर सकेंगे। ड्राइविंग स्कूल यह टेस्ट लेंगे और पास होने पर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर लाइसेंस जारी होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया है। भारी वाहनों के कारण बढ़ रही ईंधन की खपत कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
ड्राइविंग स्कूल के लिए अब पांच किमी का प्रशिक्षण ट्रैक जरूरी
प्रशिक्षण देने वाले ट्रेनिंग स्कूल या संस्थान को पांच किमी लंबा ट्रेनिंग ट्रैक बनाना होगा, जिसमें कम से कम तीन गति अवरोधक और तीन बाएं या दाएं मोड़ रहेंगे। प्रशिक्षण की अवधि कम से कम एक दिन की होगी। चालक को बताया जाएगा कि वह गाड़ी किस तरह से चलाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा ईंधन की बचत हो सके। एक्सपर्ट बताएंगे कि किस तरह की सड़क पर किस तरह से वाहन चलाना है, कितना एक्सीलेटर, क्लच और ब्रेक का इस्तेमाल करना है। गाड़ी के रखरखाव में किन बातों का ध्यान रखना है। प्रशिक्षण संस्थान को आवेदक को ट्रेनिंग के बाद एक सर्टिफिकेट भी देना होगा, जिसमें लिखा होगा कि आवेदक द्वारा फ्यूल एफिशिएंसी का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
हादसों में भी आएगी कमी
आरटीओ जितेंद्र रघुवंशी का कहना है कि नई व्यवस्था से ड्राइवर ईंधन की बचत तो सीखेंगे ही, फर्जी सर्टिफिकेट भी नहीं ला सकेंगे। इससे प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति को ही लाइसेंस मिल सकेगा, जिससे हादसों में भी कमी आएगी।
नए नियमों से फर्जी ड्राइविंग स्कूल हो जाएंगे बंद
अभी आवेदक को भारी माल या यात्री वाहन का लाइसेंस बनवाने के लिए कम से कम एक साल पुराना हल्का कमर्शियल वाहन का लाइसेंस जरूरी है। इसके साथ उसे ड्राइविंग स्कूल का सर्टिफिकेट लगाना होता है। कई ड्राइविंग स्कूल प्रशिक्षण दिए बगैर ही पैसे लेकर फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं, लेकिन नई व्यवस्था से यह सब बंद हो जाएगा। ड्राइविंग स्कूलों को कम से कम पांच किमी का ट्रैक बनाना अनिवार्य है, लेकिन सभी ड्राइविंग स्कूलों के लिए इतना लंबा ट्रैक बना पाना संभव नहीं होगा।
विकाससिंह राठौर | इंदौर
भारी माल और यात्री वाहनों को लेकर 1 जुलाई से देशभर में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके तहत भारी माल और यात्री वाहनों को चलाने के लिए ड्राइवरों को लाइसेंस तभी मिलेगा, जब वे ईंधन बचाने (फ्यूल एफिशिएंसी) का टेस्ट पास कर सकेंगे। ड्राइविंग स्कूल यह टेस्ट लेंगे और पास होने पर प्रमाण पत्र जारी करेंगे। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर लाइसेंस जारी होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया है। भारी वाहनों के कारण बढ़ रही ईंधन की खपत कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
ड्राइविंग स्कूल के लिए अब पांच किमी का प्रशिक्षण ट्रैक जरूरी
प्रशिक्षण देने वाले ट्रेनिंग स्कूल या संस्थान को पांच किमी लंबा ट्रेनिंग ट्रैक बनाना होगा, जिसमें कम से कम तीन गति अवरोधक और तीन बाएं या दाएं मोड़ रहेंगे। प्रशिक्षण की अवधि कम से कम एक दिन की होगी। चालक को बताया जाएगा कि वह गाड़ी किस तरह से चलाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा ईंधन की बचत हो सके। एक्सपर्ट बताएंगे कि किस तरह की सड़क पर किस तरह से वाहन चलाना है, कितना एक्सीलेटर, क्लच और ब्रेक का इस्तेमाल करना है। गाड़ी के रखरखाव में किन बातों का ध्यान रखना है। प्रशिक्षण संस्थान को आवेदक को ट्रेनिंग के बाद एक सर्टिफिकेट भी देना होगा, जिसमें लिखा होगा कि आवेदक द्वारा फ्यूल एफिशिएंसी का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
हादसों में भी आएगी कमी
आरटीओ जितेंद्र रघुवंशी का कहना है कि नई व्यवस्था से ड्राइवर ईंधन की बचत तो सीखेंगे ही, फर्जी सर्टिफिकेट भी नहीं ला सकेंगे। इससे प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति को ही लाइसेंस मिल सकेगा, जिससे हादसों में भी कमी आएगी।