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मन लागो मेरो यार फकीरी में

3 वर्ष पहले
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जाल सभागृह में सोमवार को मालवी, शास्त्रीय रागों और पंडवानी शैली में कलाकारों ने प्रस्तुति दी।

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

यह कबीर की वाणी थी और इसे सोमवार को अलग-अलग अंदाज़ और शैली में गाया गया। इसमें कबीर की वाणी की शास्त्रीय रागों पर गाया गया तो मालवी के ठेठ अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया तो छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी शैली में भी गाया गया। जाल सभागृह में सोमवार को स्वरांगिनी जनविकास समिति ने कबीर विचार यात्रा गायन के जरिए प्रस्तुत की। इसमें दयाराम सरोलिया और अोमप्रकाश सोमानी ने मालवी, रोहित चावरे ने रागों पर आधारित और अंजना सक्सेना ने हिंदी में और नीतू झारिया ने पंडवानी में कबीर की कथा कही। इसमें कबीर के पाखंड पर प्रहार, गुरु की महिमा और ज़िंदगी के फलसफे को सुरीले ढंग से गाया गया। स्वरांगिनी समूह के कलाकारों ने सामूहिक वंदना प्रस्तुत की।

चादर हो गई बहुत पुरानी

दयाराम सरोलिया और अोमप्रकाश सोमानी ने बंदिगी बिन जीवन जिया जिंदगी खाली गई को मालवी मिठास के साथ गाया और इसके बाद मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले को फक्कड अंदाज में प्रस्तुत किया। तम्बूरा सुन ले साधौ से उन्होंने समापन किया। इसके बाद रोहित चावरे ने राग जोग पर आधारित भजन मन राम नाम धुन गा ले रागदारी के साथ गाया और उसके बाद भीमपलासी में मन लागो यार मेरो फकीरी में प्रस्तुत किया। समापन उन्होंने चदरिया झीनी से किया। इसके बाद शहर की गायिका अंजना सक्सेना ने झीनी झीन चदरिया, चादर हो गई बहुत पुरानी और कौन ठगवा नगरिया लुटन से समापन किया। इसके बाद नीतू झारिया ने भावपूर्ण ढंग से कबीर कथा को पंडवानी शैली में प्रस्तुत किया। तबले पर महेश यादव, मंजीरा पर दिनेश यादव और हारमोनियम पर मनीष देव ने संगत की।

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