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हिंदी साहित्य में लोकप्रिय होना अपराध है...

3 वर्ष पहले
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हिंदी साहित्य में लोकप्रिय होना अपराध है...

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

ख्यात व्यंग्यकार शरद जोशी के जन्मदिन पर उन्हें शिद्दत से याद किया गया। उनसे जुड़ी यादें साझा की गई तो उनका तीखा और चुटीला आत्मकथ्य भी पढ़ा गया तो शहर के दो रंगकर्मियों ने उनके दो व्यंग्यों का पाठ भी किया। प्रीतमलाल दुआ सभागृह में सूत्रधार के इस कार्यक्रम में शरद जोशी की ऑडियो भी सुनाया गया तो उनके लिखे गए लोकप्रिय टीवी धारावाहिक की एक कड़ी भी दिखाई गई।

उन्होंने जीवन भर विरोध की कीमत चुकाई : प्रो. सरोजकुमार ने कहा कि शरद जोशी ने सत्ताधारियों के खिलाफ हमेशा विरोध दर्ज किया और जीवन भर इसकी कीमत चुकाई। इसके बाद संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने शरदजी के लेख काहे की आत्मा काहे का कथ्य का वाचन किया। इसमंे वे कहते है - मेरा कसूर यह है कि लोग मुझे पढ़ते हैं। हिंदी में पठनीय साहित्य, साहित्य नहीं होता। वह कुछ भ्रष्ट और सतही सी चीज होता है। मैं बहुत शुरू से उन पत्र-पत्रिकाओं में लिखने लगा, जिनकी बिक्री ज्यादा थी, जो ज्यादा पाठकों से जुड़ती थी। हिंदी में लोकप्रिय होना अपराध है।

छायावाद का चक्कर छोड़ और प्रयोगवाद में आ जाओ : रंगकर्मी संतोष जोशी ने शरद जोशी का व्यंग्य भूतपूर्व प्रेमिकाओं को पत्र का प्रभावी वाचन किया। उन्होंने पढ़ा चंद्रा झा रवींद्र साहित्य पढ़े बैठी थी। अत: चार दिन में समझ गई कि मैं उस पर निछावर हूं। मैंने सबसे पहले उसे मॉडर्न बनाया। अज्ञेय पढ़ाया, गुनाहों का देवता की प्रति भेंट की, कृश्नचंदर की चाशनी चटाई, अमृता प्रीतम की कविताएं सुनाईं। बच्चन को कवि सम्मेलन में बुलवाया, तारसप्तक पर बहसें कीं और इलाहाबादी पत्रिकाओं की फाइल सौंपकर कहा- चंद्रा रानी, छायावाद का चक्कर छोड़ और प्रयोगवाद में आ जाओ।

ख्यात व्यंग्यकार शरद जोशी के जन्मदिन पर उनका आत्मकथ्य और व्यंग्य पढ़े गए

प्रो. सरोजकुमार

श्रीराम जोग

संतोष जोशी

सारा देश ही शर्मिंदा है

अंत में वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीराम जोग ने व्यंग्य शर्म मगर तुमको आती है का साभानिय पाठ किया। उन्होंने पढ़ा : कई बातें ऐसी हैं जिस पर जनता और नेता सभी शर्मिंदा रहते हैं। पूज्य बापू के बताए मार्ग पर देश का न चल पाना। इसे लेकर जनता हमें कहती है कि शर्म आनी चाहिए। हम जनता को कहते हैं कि तुम्हें शर्म आनी चाहिए। गरज यह है कि दोनों शर्मिंदा हैं। इस प्रकार सारा देश ही शर्मिंदा है। आखिर देश है क्या- जनता और नेता से मिलकर ही तो देश बना है। संचालन सत्यनारायण व्यास ने किया।

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