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सवा सौ साल पुराने सुख निवास पैलेस को म्यूज़ियम बनाएगा आरआर केट

3 वर्ष पहले
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राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (आरआर केट) के परिसर में मौजूद सुख निवास पैलेस जल्द ही साइंस म्यूज़ियम का रूप अख्तियार करने वाला है। सवा सौ साल पुरानी इस बिल्डिंग को म्यूज़ियम का रूप देने के लिए फिलहाल इसे झील और दूसरे संभावित खतरों से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद भवन को नया रूप देते हुए लेज़र और एक्सलरेटर लाइट्स पर आधारित म्यूज़ियम तैयार किया जाएगा। इसेे स्कूली बच्चों के लिए खोला जाएगा। सुख निवास पैलेस इसी वर्ष अपने निर्माण के सवा सौ साल पूरे करने जा रहा है।

केट के निदेशक डॉ. पी.ए. नाईक ने बताया कि सुख निवास झील के किनारे बने पैलेस में हम साइंस म्यूज़ियम बनाएंगे। चूंकि केट में एक्सलरेटर और लेज़र्स पर काम होता है और इनमें लाइट्स निकलती है इसलिए म्यूज़ियम की थीम लाइट्स ही होगी। म्यूज़ियम बनाने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूज़ियम की मदद भी ली जाएगी। हमने सालभर में इसे बनाने का लक्ष्य रखा है। म्यूज़ियम तैयार होने के बाद इसे स्कूली बच्चों के लिए खोला जाएगा।

पुरातत्व विभाग से भी अनुमति ली गई

निदेशक डॉ. नाईक के अनुसार झील के पानी के कारण पैलेस के फाउंडेशन और बेसमेंट को नुकसान हुआ है। इससे बचाने के लिए एक कट ऑफ वॉल बनाई जा रही है। इसके बाद फाउंडेशन और फ्लोर को मजबूत किया जाएगा। चूंकि ये ऐतिहासिक महत्व की बिल्डिंग है इसलिए हमने पुरातत्व विभाग से भी इजाज़त ली है।

पैलेस रोड पर व्हीकल्स बैन

केट ने पैलेस को सुरक्षित रखने के लिए पुरातत्व विभाग की मदद भी ली थी। विभाग के 8 अधिकारियों के दल ने दौरा कर कुछ सुझाव दिए थे। इन पर अमल करते हुए केट ने पैलेस के सामने स्थित रोड के करीब 400 मीटर के हिस्से पर भारी और चारपहिया वाहनों को प्रतिबंधित भी किया है। फिलहाल ये रास्ता पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए ही खुला है।

कभी था पिकनिक स्पाॅट

पुरातत्व विभाग के अधिकारी प्रकाश परांजपे ने बताया- सुख निवास पैलेस का निर्माण महाराजा शिवाजीराव होलकर ने करवाया था। होलकर शासन काल में इसका उपयोग शाही मेहमानों को रुकवाने और मनोरंजन के लिए किया जाता था। सुख निवास झील के किनारे बने इस पैलेस के चारों ओर घने पेड़ हुआ करते थे। होलकरों के शासन के बाद इसे करीब 1975 में आरआर केट को दे दिया गया। इससे पहले ये लंबे समय तक लोगों के पिकनिक स्पॉट की तरह भी उपयोग किया जाता था।

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