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हमारे मुल्क का हरेक बच्चा, फिरका फिरका बंटा हुआ है

3 वर्ष पहले
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उनके कहे में सादगी है, कहने के ढंग में सादगी है। और शायरी में जो कहते हैं, इसमें अपने वतन से सिर्फ मोहब्बत ही नहीं, गहरी चिंता भी बयां होती है। ये हैं शायर तारिक शाहीन। उनकी शायरी में दिली मोहब्बत और देश के मसाइल पर बिंदास ढंग से बात कहने की हिम्मत है। उन्होंने रविवार को ग़ज़लें सुनाई। एक कॉफी हाउस में किए गए कार्यक्रम में उन्होंने एक ग़ज़ल में फरमाया : चमन ग़ुलों से अटा हुआ है, दिल चाकू से कटा हुआ है, हमारे मुल्क का हरेक बच्चा फिरक़ा-फिरक़ा बंटा हुआ है।

सारी बस्ती बिलख रही है, पागल का सम्मान हुआ है : उन्होंने कुछ ग़ज़ल और कुछ अशआर पढ़े। उन्होंने ग़ज़ल पढ़ी कि झूठों का ऐलान हुआ है, देश का नव-निर्माण हुआ है, यादों के लोभान की खुशबू, पूजन का सामान हुआ है, सारी बस्ती बिलख रही है, पागल का सम्मान हुआ है। कुछ शेर पढ़ते उन्होंने फरमाया : एक सदा है मेरे ताक़ूब में, जिसने पत्थर मुझे बनाया है, कोई रास्ता न भूल पाए कहीं, सो मुझे एक दिया जलाना है। उनकी शायरी पर नरेंद्र शर्मा ने विचार कहे। इसके बाद डॉक्टर संजय भालेराव ने चिकित्सा क्षेत्र में चल रही गलत प्रैक्टिस के बारे में जानकारियां दी। इराक के इस कार्यक्रम में शहर के चुनिंदा साहित्यकार मौजूद थे।

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