पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • हिंसा के विरूद्ध मूकदर्शक बनकर आवाज़ ना उठाना भी हिंसा

हिंसा के विरूद्ध मूकदर्शक बनकर आवाज़ ना उठाना भी हिंसा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नई दिल्ली के विचारक-आलोचक अपूर्वानंद ने अपना ‌व्याख्यान बीच में रोककर गाज़ा पट्टी में मारे गए 50 फिलिस्तीनियों के प्रति एक मिनट का मौन रखवाया और कहा कि हिंसा के खिलाफ मूकदर्शक बने रहना और आवाज़ ना उठाना भी एक तरह की हिंसा है। हिटलर ने यहूदियों का नरसंहार किया।उस घटना को जर्मनी के नागरिकों ने नहीं भूलने का फैसला लिया। इसी का परिणाम है कि आज भी वहां स्कूलों में शिक्षा में यह पढ़ाया जाता है कि आखिर यह नरसंहार क्यों हुआ। यह पढ़ाने के पीछे मकसद यह है कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति देश में दूसरी बार ना हो। यह बात उन्होंंने जाल सभागृह में अभ्यास मंडल की 59 की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में मंगलवार को कही। वे हिंसा के विरुद्ध शिक्षा कैसे हो विषय पर बोल रहे थे।

यह बात आलोचक-लेखक डॉ. अपूर्वानंंद ने हिंसा के विरुद्ध शिक्षा कैसे हो विषय पर व्याख्यान में कही

डॉ. अपूर्वानंंद

प्रेम और सद्भाव भी अभ्यास से ही पनपते हैं

उन्होंने कहा कि हमारे देश में हिंसा के विरुद्ध शिक्षा के लिए गैर राजनैतिक संगठनों को आगे आना होगा। लोगों को इस बात के प्रति जागरूक करना होगा कि वे अपने को भीड़ में बदलने से रोक सके क्योंकि भीड़ में सोचने-समझने की ताकत नहीं होती है। व्यक्ति प्रधान समाज ही सोचने समझने की शक्ति रखता है लिहाजा यह अभ्यास शिक्षा के जरिए निरंतर कराया जाना चाहिए कि भीड़ की तरह नहीं, व्यक्ति की तरह सोचा जाए और हिंसा में कतई शामिल ना हों। मानव वृत्तियां अभ्यास से निर्मित होती हैं। हम यह मानते हैं कि प्रेम और सद्भाव तो हमारा स्वभाव है लेकिन यह गलत है। यह भी हमारे अंदर अभ्यास से ही पनपता है।

हिंसा की घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता

उन्होंने कहा कि हमारे देश में ऐसा इतना बड़ा जनसंहार कभी नहीं हुआ जिसमें लाखों लोगों की मौत हो गई हो लेकिन छोटे-छोटे जनसंहार के ऐसे मील के पत्थर हमारे देश में लगे हुए हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता है। हमें समाज को भीड़ में तब्दील होने से रोकना होगा। आज भी हम स्कूली शिक्षा में बच्चों के समक्ष यह सवाल पैदा नहीं कर सके कि आखिर महात्मा गांधी की हत्या क्यों हुई थी। इस बारे में हमारे यहां कहा जाता है कि यह नकारात्मक विचार है। बच्चों का मन और मस्तिष्क बहुत कोमल होता है, उस पर ऐसे विचारों से बुरा असर पड़ता है। आभार नूर मोहम्मद कुरैशी ने माना।

खबरें और भी हैं...