शृंगारिक कविता छोड़ वे प्रगतिशील कविता की ओर मुड़ गए थे
इंदौर | श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के उपसभापति और देश के प्रसिद्ध कवि-साहित्यकार बालकवि बैरागी को मंगलवार को समिति में श्रद्धांजलि दी गई। साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने कहा कि वे मूलत: मालवी कवि थे लेकिन बाद में उन्होंने हिंदी कविताएं लिखना शुरू किया। जल्द ही शृंगारिक कविताएं लिखना छोड़कर वे प्रगतिशील कविता की ओर मुड़ गए। वे निष्ठावान नेता रहे और तमाम पदों पर रहते हुए सहज सरल बने रहे। सूर्य प्रकाश चतुर्वेदी ने कहा बैरागीजी संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी थे और अपनी कविताओं के माध्यम से सदैव समाज में जागृति लाने का प्रयास करते रहे। चंद्रसेन विराट हरमोहन नीमा, भूपेंद्र पांडे, प्रदीप नवीन, डॉ संध्या भराडे और कुसुम मंडलोई ने अपनी स्मृतियां साझा की। इस मौके पर शहर की साहित्यिक संस्थाओं के सदस्य मौजूद थे। संचालन हरेराम वाजपेयी ने किया।