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पहली बार आए डेसिमल के सवालों में उलझे स्टूडेंट्स, कठिन रहा पेपर

3 वर्ष पहले
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आईआईटी में एडमिशन के लिए शनिवार को हुए जेईई एडवांस्ड एग्ज़ाम का पेपर पिछले साल के मुकबाले टफ रहा। पहले और दूसरे पेपर में फिजिक्स के सवाल आसान थे जिससे स्टूडेंट्स को राहत मिली। जेईई में पहली बार ऐसे न्यूमेरिकल टाइप प्रश्न पूछे गए जिनमें स्टूडेंट्स को डेसिमल के बाद दो अंकों तक जवाब देना था। हालांकि स्टूडेंट्स को दिए गए निर्देशों में साफ लिखा गया था कि जवाब में दशमलव के बाद के दो अंक भी लिखना है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कई स्टूडेंट्स को कन्फ्यूज़न हुआ।

जिन्होंने केमिस्ट्री की इनडेप्थ स्टडी की उनके लिए आसान रहा पेपर

पेपर में आठ सवाल ऐसे पूछे गए थे जिनका जवाब दशमलव में था। सही जवाब के लिए स्टूडेंट्स को तीन अंक दिए जाएंगे। इनमें माइनस मार्किंग नहीं थी। एक्सपर्ट विजित जैन ने बताया कि स्टूडेंट्स के मन में जवाब देते समय संशय ये था कि किसी सवाल का जवाब यदि 7 है तो उसे 7.00 लिखा जाए या केवल 7। गणित के नियमों के अनुसार केवल 7 भी सही जवाब है। हालांकि निर्देशों के अनुसार दशमलव के बाद के दो अंक लिखे जाना ज़रूरी थे। दोनों ही पेपर के हर सेक्शन में ऐसे 8-8 सवाल किए गए थे। पेपर-1 कुल 180 नंबरों का था जिसे तीन भागों में बांटा गया था। सेक्शन 1 में एक या एक से ज्यादा सही जवाब थे। सेक्शन में न्यूमेरिकल वैल्यू वाले सवाल पूछे गए। सेक्शन 3 में कॉम्प्रीहेंसिव सवाल थे।

एक्सपर्ट सुमित उपमन्यु के अनुसार पहले पेपर में केमेस्ट्री के सवाल औसत थे लेकिन दूसरे पेपर में ये कॉन्सेप्च्यूअल थे। जिन स्टूडेंट्स ने केमेस्ट्री की इनडेप्थ स्टडी की है उनके लिए ये सवाल आसान थे। मैथ्स का हिस्सा थोड़ा लंबा था। चूंकि न्यूमरिकल सवालों की संख्या ज्यादा थी इसलिए उन्हें हल करने में समय लगा।

तुक्का प्रवृत्ति रोकी गई

विजित जैन के अनुसार इस वर्ष का पेपर सन् 2016 के मुकाबले सरल था। न्यूमेरिकल आंसर (संख्यात्मक मान) होने की वजह से तुक्के मारने की प्रवृत्ति को रोका गया। फिजिकल केमिस्ट्री में कैल्कुलेशन बेस्ड प्रश्न होने की वजह से केमिस्ट्री टाइम कंज्युमिंग रहा। फ़िज़िकल केमिस्ट्री के सवाल बहुत केल्कुलेटिव थी जिसकी वजह से दशमलव के दो स्थान के अंक निकालना मुश्किल था। इस बार एडवांस्ड में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को फ़ायदा मिल सकता है।

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