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शाम होती है तो बेचैन हो जाता हूं अपनों से बतियाने को, इन्हीं पलों का इंतज़ार रहता है मुझे

3 वर्ष पहले
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\\\"होती है तारीफ अहमियत की, इंसानियत की मगर क़दर होती है

तरजीह न दे ओहदे को इंसानियत पर, बंदे पर ख़ुदा की तब नज़र होती है...।

यह शेर धर्मेंद्र ने लिखा है और सिटी भास्कर से मुलाकात में उन्होंने अपने लिखे कुछ उम्दा अश्आर सुनाए जिनमें ज़िंदगी के सुख-दु:ख और कई रंग हैं। 82 साल की उम्र में भी वे कसरत करते हैं। इंदौर आए तो साफ सुथरे इंदौर की तारीफें करते हुए होटल पहुंचे। पहुंचते ही पहला सवाल किया, जिम कहां है। बड़ी देर तक अपने चाहनेवालों के साथ सेल्फीज़ खिंचवाते रहे। फोटोग्राफर्स को यह भी बताते रहे कि इधर रोशनी ज्यादा है, इधर से तस्वीर अच्छी बनेगी। धर्मेंद्र रविवार को हुए दंगल के लिए इंदौर आए थे। एक्टर विद्युत जामवल भी साथ थे। बातचीत में धर्मेंद्र ने बताया कि \\\"आजकल मेरा ज्यादातर वक्त लिखने में बीतता है। जो मेरे क़रीबी हैं, वो जानते हैं कि कविताएं लिखना मैंने कब शुरू किया। यह तब की बात है जब मेरी पीठ की सर्जरी हुई थी। मैं दर्द में भी था और ज्यादातर वक्त अकेले बीतता था। उस दर्द में, खालीपन में कविताओं ने मुझे थामा। जल्दी ही मैं अपनी लिखी कविताओं का वीडियो एल्बम भी लाऊंगा।\\\"

एक्टिंग मेरा प्रोफेशन नहीं मेरी महबूबा है

एक्टिंग को मैं प्रोफेशन मानता ही नहीं। ये मेरी महबूबा है। यह रूठ जाती है, मैं मना लेता हूं। मैं रूठ जाऊं ये मना लेती है। 60 साल से यही चलता आ रहा है। मेरे पिता स्कूल टीचर थे, वो मुझे प्रोफेसर बनाना चाहते थे। उस ज़माने में तो लड़कों को भी इस लाइन में नहीं आने देते थे। लेकिन हमने फोटो भेज दिए फिल्मफेयर को और सिलेक्ट हो गए। बाद में ख़त लिखकर पिताजी को भी मना लिया। हालांकि यह अफसोस होता है कि उनके साथ ज्यादा वक्त न बिता सका मैं। तब मैं कॅरियर बनाने में लगा हुआ था। शायद यही वजह है कि अब शाम होती है तो मन परिवार के साथ बैठ बतियाने को बेचैन होने लगता है। यकीन मानिए, वो सबसे अच्छे पल होते हैं जिनका मैं पूरे दिन इंतज़ार करता हूं।

जीवन हर क्षण दंगल, जब तक ज़िंदगी है लड़ना है

कुश्ती खेल नहीं जज़्बा है। ज़िंदगी हर क्षण दंगल है। मुसीबतों से लड़ना क्या कम मुश्किल है। बहुत जेाखिम हैं हर कदम। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं इस उम्र में भी आपके चेहरे पर इतना नूर कैसे है। मेरा फलसफा बस इतना है कि यह देख लो कि जो कर रहे उस काम का मकसद गलत तो नहीं। मुस्काराते हुए हर कोई खूबसूरत लगता है। हमेशा मुस्कराइए।

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