सुर-ताल, ग़ज़लें-नज्मे, रैप और किस्सागोई का दौर चला इस कैजुअल जैमिंग में। मकसद था माता-पिता से दूर होती आज की पीढ़ी को फिर उनके पास लाना। इस जैमिंग के साथ \\\"टाई अ नॉट\\\' कैम्पेन भी शुरू किया गया जिसके तहत सभी वादा करेंगे कि \\\"हम सभी अपने माता, पिता या दोनों को, 17 जून के पहले, उनके हाथ में एक धागा बांधकर या सिर्फ उनका हाथ पकड़ कर, उन्हें वादा करें कि हम सदा उनका सम्मान करेंगे, हमेेशा उनके साथ रहेंगे और हरदम उनसे इतना ही प्यार करेंगे। यहां कुछ प्रस्तुतियां भी दी गईं :
कहने को तो घर है मेरा / लगे खाली सा/ तेरे बिन मां। आंगन बगिया फूलों की/ महके तो कैसे/ तेरे बिन मां। आज़ाद है यहां की पवन / फिर भी ठहरी सी/ तेरे बिन मां। चमक भरी है इन आंखों में/ है फिर भी नम / तेरे बिन मां। देखा आसमां और है पंख कोमल/ उडूं तो कैसे/ तेरे बिन मां। कहने को तो हलचल है कायनात में/ लगे शांत सब/ तेरे बिन मां। आता है सूरज भी रोज़ यहां/ लगे अंधेरा सा/ तेरे बिन मां। जीने का सहारा बहुत है/ जियूं तो कैसे/ तेरे बिन मां।
- अमोघ अग्रवाल
कभी यूं भी मिलने आया कर, यार वक़्त कुछ तो बिताया कर। तू पास है तो एहसास होने दे, चाहे नगमा कोई गुनगुनाया कर। ये गुलाबी खत सब पढ़ना जानते हैं, वक़्त रहते इनको जलाया कर। मेरे पड़ोसी को शोर खलता है तेरा, तू आवाज़ ज़रा धीरे लगाया कर। - हेमंत विश्वकर्मा
सिटी रिपोर्टर | इंदौर
सुर-ताल, ग़ज़लें-नज्मे, रैप और किस्सागोई का दौर चला इस कैजुअल जैमिंग में। मकसद था माता-पिता से दूर होती आज की पीढ़ी को फिर उनके पास लाना। इस जैमिंग के साथ \\\"टाई अ नॉट\\\' कैम्पेन भी शुरू किया गया जिसके तहत सभी वादा करेंगे कि \\\"हम सभी अपने माता, पिता या दोनों को, 17 जून के पहले, उनके हाथ में एक धागा बांधकर या सिर्फ उनका हाथ पकड़ कर, उन्हें वादा करें कि हम सदा उनका सम्मान करेंगे, हमेेशा उनके साथ रहेंगे और हरदम उनसे इतना ही प्यार करेंगे। यहां कुछ प्रस्तुतियां भी दी गईं :
कहने को तो घर है मेरा / लगे खाली सा/ तेरे बिन मां। आंगन बगिया फूलों की/ महके तो कैसे/ तेरे बिन मां। आज़ाद है यहां की पवन / फिर भी ठहरी सी/ तेरे बिन मां। चमक भरी है इन आंखों में/ है फिर भी नम / तेरे बिन मां। देखा आसमां और है पंख कोमल/ उडूं तो कैसे/ तेरे बिन मां। कहने को तो हलचल है कायनात में/ लगे शांत सब/ तेरे बिन मां। आता है सूरज भी रोज़ यहां/ लगे अंधेरा सा/ तेरे बिन मां। जीने का सहारा बहुत है/ जियूं तो कैसे/ तेरे बिन मां।
- अमोघ अग्रवाल
कभी यूं भी मिलने आया कर, यार वक़्त कुछ तो बिताया कर। तू पास है तो एहसास होने दे, चाहे नगमा कोई गुनगुनाया कर। ये गुलाबी खत सब पढ़ना जानते हैं, वक़्त रहते इनको जलाया कर। मेरे पड़ोसी को शोर खलता है तेरा, तू आवाज़ ज़रा धीरे लगाया कर। - हेमंत विश्वकर्मा