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बांसुरी पर बिहाग में लयकारी का आनंद व भटियाली का माधुर्य

3 वर्ष पहले
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जब उन्होंने बांसुरी वादन शुरू किया तब मौसम में खासी तपिश थी लेकिन जैसे-जैसे उनका वादन शिखर पर पहुंचा उनके वादन की शीतलता और मधुरता ने तपिश दूर कर दी। श्री शनैश्चर जयंती अखिल भारतीय संगीत समारोह का समापन लखनऊ के पं. सुनीलकांत गुप्ता के बांसुरी वादन से किया गया। पंडित सुभाष राय और पं. अजय चक्रवती के इस शिष्य ने राग पूरिया, बिहाग और भटियाली धुन प्रस्तुत की।

राग हमीर में बजाई बंदिश

शनि मंदिर में तीसरी बार प्रस्तुति देने आए इस कलाकार ने वादन की शुरुआत राग पूरिया से की। एक संक्षिप्त आलाप के बाद उन्होंने एक रचना बजाई। इसके बाद राग बिहाग बजाया। इसमें उनकी लयकारी अद्भुत थी। उनका वादन इस बात का बेहतर पता दे रहा था कि उनकी रियाज़ दमदार है। इसके बाद उन्होंने राग हमीर में बंदिश बजाई। समापन उन्होंने भटियाली धुन से किया। इसमें धुन का रसानंद भी था और मधुरता थी। उनके साथ तबले पर संगीता अग्निहोत्री ने संगत की।

Music Fest

कार्यक्रम में पं. सुनीलकांत गुप्ता ने बांसुरी वादन किया।

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