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फ्लो मीटर एक डिवाइस है, इसी से रखा जाएगा पानी का हिसाब

3 वर्ष पहले
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इंदौर डीबी स्टार

फ्लो मीटर एक डिवाइस है, जो पाइप लाइन की बीच में लगाई जाती है। इसमें तांबे की वाइंडिंग होती है, जिन्हें क्वाइल भी कहा जाता है। लाइन का पानी जब इन क्वाइलों से होकर गुजरता है तो उसमें मैग्नेटिक फील्ड बनता है।

जितनी मात्रा में पानी इस वाइंडिंग पाइप से गुजरता है, मीटर में उसी के हिसाब से रीडिंग आ जाती है। इस तरह मीटर लगाने से यह पता लगना शुरू हो जाएगा कि जलूद से कितना पानी भेजा गया और पानी की टंकियों और डायरेक्ट सप्लाई में कितना पानी आया। इस तरह फ्लो मीटर लगने के बाद पानी का हिसाब मिलना शुरू हो जाएगा।

पांच किमी की लाइन बदलेंगे

 जलूद से बायपास की सर्विस रोड तक करीब पांच किमी की लाइन में लीकेज की समस्या ज्यादा है। इन सभी जगहों पर अमृत योजना के तहत पाइप लाइन बदलेंगे। इससे पानी की बर्बादी बहुत कम हो जाएगी। डायरेक्ट सप्लाई कम करने के लिए 22 नई टंकियां बनाएंगे। साथ ही फ्लो मीटर लगाकर वॉटर ऑडिट करने की योजना भी है। संजीव श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नर्मदा प्रोजेक्ट

पानी की बर्बादी रोकने के लिए नर्मदा की लाइनों में फ्लो मीटर लगाएंगे

 नर्मदा के पानी की बर्बादी रोकने के लिए फ्लो मीटर लगाने की योजना है। मीटर लगाने के बाद पानी का हिसाब मिलना शुरू हो जाएगा। अवैध कनेक्शनों का भी पता लगाया जा सकेगा। योजना पूरी होने के बाद पानी की बर्बादी कम हो जाएगी। एसके कुरील, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर नगर निगम

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