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रिसर्च के लिए 2 से 5 करोड़ खर्च कर सकते हैं मेडिकल कॉलेज

3 वर्ष पहले
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मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए अब अलग से बजट दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसके लिए कॉलेजों को दो से पांच करोड़ का बजट खर्च करने के लिए कहा है। यह भी कहा है कि किसी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेेने पर स्पॉन्सरशिप दी जाएगी, ताकि डॉक्टर्स खुद को अपग्रेड कर छात्रों को भी पढ़ा सकें।

एसीएस राधेश्याम जुलानिया ने डॉक्टरों से मिलकर इस बात पर नाराजगी जताई थी कि जिस प्रकार मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई होना चाहिए, वैसी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा पढ़ाई, कॉन्फ्रेंस के लिए फंड है। राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस के लिए 15 लाख और राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस के लिए 50 लाख रुपए दिए जाएंगे। केवल विभाग को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना होगा। 15 दिन में टीएडीए बिल पास किए जाने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार रिसर्च के लिए पांच करोड़ का बजट आवंटित करती है। डॉक्टर इन पैसों का उपयोग रिसर्च के लिए करें। इसके लिए प्रोजेक्ट बनाएं। एथिकल कमेटी से मंजूरी लें और उसके बाद रिसर्च के काम में राशि का उपयोग करें। कई बार रिसर्च में मरीजों की जांचें व एमआरआई करवाना होती हैं, जो काफी महंगी होती हैं, इसलिए डॉक्टर्स इससे बचना चाहते हैं। हर विभाग इसमें हिस्सेदारी करे।

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