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ब्रेनडेड घोषित होने के पहले नहीं कर सकते अंगदान के लिए परिजनों की काउंसलिंग
कैडेबर आॅर्गन डोनेशन को लेकर बवाल मचने के बाद शुक्रवार को एमवायएच के डॉक्टरों ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन से मुलाकात की और कहा कि ब्रेनडेड घोषित होने के पहले अंगदान के लिए परिजनों की काउंसलिंग नहीं की जा सकती।
दो दिन पहले एमवायएच में एक मरीज के जीवित होने के बावजूद मुस्कान ग्रुप के सदस्यों ने उसे ब्रेन डेड बताकर उसके परिजनों पर अंगदान के लिए दबाव बनाया था। इसकी शिकायत भी हुई थी। इस वाकये के बाद पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा हो गया है। शुक्रवार को डॉक्टरों ने भी अपना पक्ष एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डाॅ. शरद थोरा के सामने रखा।
मूसाखेड़ी निवासी 19 वर्षीय सचिन को हेड इंजरी के चलते बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। बताया जा रहा है कि वहां तीन लाख से अधिक का बिल बना था। डॉक्टरों ने पोटेंशियल ब्रेन डेड की आशंका जताई थी, जिसके बाद मरीज को रात में ही एमवायएच शिफ्ट किया गया। वह मरीज अभी जीवित है। डॉक्टरों ने इस पर आपत्ति ली कि एक बार ब्रेन डेड सर्टिफाइड होने के बाद काउंसलिंग की जाना चाहिए। जबकि मुस्कान ग्रुप के सदस्यों ने बीएसडी के पहले काउंसलिंग की। इस बवाल ने काउंसलिंग केे सही समय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि मरीज एप्निया टेस्ट की स्थिति तक ही नहीं पहुंचा था। हालांकि घटना वाले दिन मुस्कान ग्रुप के सदस्यों का कहना था कि उन्हें मरीज के परिजन ने ही फोन पर उसके अंगदान करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद ही वे लोग पहुंचे थे।
ऐसे बताते हैं ब्रेन डेड
किसी भी मरीज को ब्रेन डेड बताने के पूर्व 12-13 प्रकार की जांच की जाती है। ये जांचें चार सदस्यीय समिति करती है।
ड्रग टॉक्सीनेशन, दवा के साइड इफेक्ट, हाइपोथर्मिया, गैस रिफलेक्स, डाल्फ आई टेस्ट सहित अन्य जांचें होती हैं।
इनके बाद पेनफुल इस्टीम्यूलाइड यानी चिमटी कर मरीज के शरीर में हलचल देखी जाती है।
मरीज केे शरीर में ऑक्सीजन और कार्बन डाय ऑक्साइड के लेवल की जांच होती है। आखिर में एप्निया जांच होती है, जिसमें साै फीसदी ऑक्सीजन सेचुरेशन के साथ दस मिनट के लिए वेंटीलेटर बंद कर देते हैं।
फिर देखा जाता है कि वह सामान्य तरह रूप से सांस ले पा रहा है या नहीं। यदि सांस नहीं ले पाता है और जांच पॉजिटिव आती है तो यह माना जाता है कि वह ब्रेन डेड है।
यह जांच चार सदस्यीय समिति कराती है, जिसमें अस्पताल अधीक्षक, आरएमटी, फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन को रखा जाता है।
मरीज बिना वेंटीलेटर शिफ्ट किया गया था एमवायएच
हेड इंजरी के इस मरीज को बाॅम्बे हॉस्पिटल से बिना वेंटीलेटर केे शिफ्ट किया गया। साथ ही सीटी स्कैन सहित इलाज केे कोई कागजात नहीं दिए गए, जिससे यह पता चल सके कि उसे कौन सा इलाज मिला था।
डीन डॉ. शरद थोरा ने बताया कि डॉक्टर्स मिलने आए थे। उनका कहना है कि ब्रेन डेड घोषित करने के पहले ही काउंसलिंग शुरू कर दी गई, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। इस बारे में हम बात करेंगे।
इंदौर आर्गन डोनेशन सोसायटी के सह सचिव डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि हर अस्पताल में ब्रेन डेड सर्टिफिकेशन समिति बनाई गई है, जो करीब 12-13 प्रकार की जांच कराती है। उसके बाद ब्रेन डेड घोषित किया जाता है। उसके पहले काउंसलिंग नहीं की जा सकती। काउंसलिंग शुरू करने के पूर्व भी परिजन से फाॅर्म 8 भराया जाता है। प्रोटोकॉल यही कहता है कि यदि ओटी में ले जाने के पूर्व भी करीबी रिश्तेदार इनकार कर दें तो अंगदान नहीं लिया जा सकता।