हाईराइज , ग्रुप हाउसिंग में स्टे के बाद कितनी रजिस्ट्री हुई
घनत्व के पैमाने की अनदेखी कर हाईराइज और ग्रुप हाउसिंग की अनुमति दिए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट की डिविजन बेंच इस मामले में सरकार के विरोधाभासी नोटिफिकेशन पर पहले ही स्थगन दे चुकी है। अब हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि स्थगन दिए जाने के दिन से अब तक कितनी रजिस्ट्री हाईराइज और ग्रुप हाउसिंग के प्रोजेक्ट में की गई हैं। 24 अप्रैल के पहले इसकी जानकारी हाई कोर्ट को देना है। हाई कोर्ट ने स्थगन देने के साथ ही निर्देश जारी किए थे कि जो भी बिल्डर, कॉलोनाइजर संपत्ति की बिक्री करेगा तो वह हाई कोर्ट से पहले अनुमति लेगा।
जस्टिस पीके जायसवाल, जस्टिस एसके अवस्थी की बेंच के समक्ष यह मामला लगा था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रवींद्रसिंह छाबड़ा पैरवी कर रहे हैं। शासन की ओर से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने स्थगन निरस्त किए जाने की अर्जी लगाई थी। याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति ली गई थी। कोर्ट को यह भी बताया कि कई प्रोजेक्ट में कोर्ट से अनुमति लिए बगैर संपत्ति बेची जा रही है। रजिस्ट्री कर दी गई है। हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन शासन नहीं कर रहा है। याचिका में उल्लेख किया है ऐसे प्लॉट पर हाईराइज , ग्रुप हाउसिंग की परमिशन दी गई है, जिनका आकार छोटा है। ऐसे में लोगों को पानी, ड्रेनेज की समस्या होती है, जबकि भूमि विकास नियम में स्पष्ट प्रावधान दिए गए हैं।