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ब्रॉन्ज जीतने के बाद अपने जोड़ीदार साथियान से यूं गले

3 वर्ष पहले
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ब्रॉन्ज जीतने के बाद अपने जोड़ीदार साथियान से यूं गले मिलीं मणिका बत्रा। उन्होंने कुल 4 मेडल जीते।

टेबल टेनिस पहली बार 8 मेडल, मणिका ने 4 जीते

भारत ने पहली बार 3 गोल्ड समेत 8 मेडल जीते। महिला सिंगल्स में मणिका बत्रा पहली गोल्ड मेडलिस्ट बनीं। वे भारत की सबसे ज्यादा 4 मेडल जीतने वाली खिलाड़ी भी रहीं।

10 खिलाड़ी गए, 8 मेडल जीते, सक्सेस रेट 80%

वजह: इटली के मासिमो कोस्टेंटिनी को दोबारा कोच बनाया। खिलाड़ी अल्टीमेट टेबल टेनिस लीग और प्रो टूर्स में इंग्लैंड, सिंगापुर और नाइजीरिया के साथ खेला।

बैडमिंटन पहली बार 6 मेडल जीते, इनमें दो गोल्ड भी

बैडमिंटन में 6 मेडल कॉमनवेल्थ में सबसे अधिक मेडल हैं। पहली बार किसी भारतीय (साइना) ने 2 गोल्ड जीते। दिल्ली में भारत ने 2 गोल्ड समेत 4 मेडल जीते थे। तब साइना ने एक गोल्ड जीता था।

10 खिलाड़ी गए, 6 मेडल जीते, सक्सेस रेट 60%

वजह: टॉप-20 में भारत के 5 खिलाड़ी हैं। कम महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में कम रैंकिंग वाले खिलाड़ियों को भेजना। गोपीचंद की एकेडमी में विश्वस्तरीय सुविधाएं।

विदेश में पहली बार नंबर-3 रहे

भारत का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 500 मेडल जीतने वाला पांचवां देश

गोल्ड कोस्ट | भारत ने 26 गोल्ड, 20 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज सहित 66 मेडल जीतकर गोल्ड कोस्ट में 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने इतिहास का तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 500 मेडल भी पूरे हो गए। यह उपलब्धि हासिल करने वाला पांचवां देश बन गया है। भारत मेडल टैली में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर रहा। विदेश में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत पहली बार टॉप-3 में रहा। 2014 के ग्लास्गो गेम्स की 15 गोल्ड सहित 64 मेडल को पीछे छोड़ दिया। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 दिल्ली में था। तब 38 स्वर्ण सहित 101 पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहा था।

बेहतर ट्रेनिंग, एक्सपोजर और विदेशी कोच से मिली सफलता

रेसलिंग 12 खिलाड़ी शामिल, कुल 12 मेडल जीते, सक्सेस रेट 100%

शूटिंग 27 खिलाड़ी शामिल हुए, कुल 16 मेडल जीते, सक्सेस रेट 59%

क्या खास किया

शूटिंग की तरह कुश्ती में भी भारत बड़ी ताकत है। 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में 5 गोल्ड समेत 13 मेडल जीते थे।

नेशनल कैंप में ज्यादा खिलाड़ियों को जगह दी गई। कैंप का समय भी लंबा किया गया। कुछ खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा गया। प्रो-रेसलिंग लीग का भी फायदा मिला।

क्या खास किया

शूटिंग हमेशा से भारत की ताकत रहा है। ओवरऑल ऑस्ट्रेलिया के बाद सबसे अधिक गोल्ड जीते हैं।

वर्ल्ड कप में युवाओं को मौका देना। शॉट गन के साथ-साथ राइफल, पिस्टल के लिए विदेशी कोच नियुक्त करना। दो साल पहले एक विदेशी कोच था, अब चार विदेशी कोच हैं।

आखिरी दिन भारत को एक गोल्ड सहित 7 मेडल, 26 गोल्ड समेत 66 मेडल जीते; 11 दिन चले गेम्स में भारत के प्रदर्शन का एनालिसिस

बॉक्सिंग 12 खिलाड़ी शामिल हुए, कुल 9 मेडल जीते, सक्सेस रेट 75%

वेटलिफ्टिंग 16 खिलाड़ी शामिल हुए, 9 मेडल जीते, सक्सेस रेट 56%

क्या खास किया

एक साल पूर्व बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की नई टीम आई। फेडरेशन को खेल मंत्रालय से मान्यता मिली।

चार साल बाद नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन हुआ।

पिछले एक साल में भारत के बॉक्सरों के लिए 32 विदेशी टूर आयोजित हुए। विदेशी कोच भी रखे गए।

क्या खास किया

पिछले चार साल से हर साल 500 डोप टेस्ट।

हाई क्वालिटी के लिए फूड सप्लीमेंट जर्मनी से मंगाए गए।

एक महीने पहले ही ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए थे। हर खिलाड़ी की जरूरत के लिए अलग-अलग डाइट शेड्यूल। 4साल में वेटलिफ्टरों ने नेशनल कैंप से 10-12 से ज्यादा छुट्‌टी नहीं ली।

 इंदौर, सोमवार, 16 अप्रैल, 2018

भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने

जीते 3 गोल्ड समेत 10 मेडल

पाकिस्तान की पूरी टीम के सिर्फ 5 मेडल

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के अच्छे प्रदर्शन की वजह सेना भी है। देश के 218 सदस्यीय दल में 19 खिलाड़ी सेना के थे। इन्होंने 3 गोल्ड समेत 10 मेडल जीते। 2014 में ग्लास्गो गेम्स में सेना के 17 खिलाड़ियों ने 6 मेडल जीते थे। पिछली बार सेना के खिलाड़ियों का सक्सेस रेट 35% था, जो इस बार 53% तक पहुंच गया।

सेना के खिलाड़ियों का सक्सेस रेट 18% बढ़ा

गोल्ड कोस्ट में 19 खिलाड़ी ने 10 मेडल जीते, सक्सेस रेट 53% रहा।

ग्लास्गो गेम्स में 17 खिलाड़ियों ने 6 मेडल जीते थे, सक्सेस रेट 35% था।

सेना के खिलाड़ियों का सक्सेस रेट 18% बढ़ा

नीरज चोपड़ा, जेवलिन थ्रो

20 साल के नीरज ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड जीता। उन्होंने 86.47 मीटर थ्रो किया। यह प्रदर्शन रियो ओलिंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट से भी बेहतर है। नीरज कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाले पांचवें भारतीय बने।

गौरव सोलंकी, बॉक्सिंग

21 साल के गौरव सोलंकी ने 52 किग्रा वर्ग की बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल दिलाया। उन्होंने फाइनल में आयरलैंड के ब्रैंडन इरविन को हराया। गौरव यूथ वर्ल्ड चैंपियनिशप में भी सिल्वर मेडल जीत चुके हैं।

3 सिल्वर, 4 ब्रॉन्ज: सेना के 3 बॉक्सर अमित, मनीष कौशिक, सतीश कुमार ने सिल्वर जीते। शूटर ओमप्रकाश ने दो, वेटलिफ्टर दीपक व बॉक्सर हुसामुद्दीन ने एक-एक ब्रॉन्ज जीता।

वजह मैच जैसे हालात में प्रैक्टिस कराई

मेडल जीत सकने लायक शूटिंग, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स जैसे कुछ खेल चुने गए। कोच और सुविधाएं बढ़ाई गईं।

खिलाड़ियों को एक्सपोजर दिलाने के लिए विदेशी टूर्नामेंट में भेजना। स्पोर्ट़्स साइकॉलजिस्ट का सेशन कराना, ताकि खिलाड़ी दबाव झेल सकें।

प्रैक्टिस भी मैच के हालात में करना। यानी, सेना ने अपने खिलाड़ियों की प्रैक्टिस दर्शकों के बीच कराई। शूटर्स के लिए बेंचमार्क तय किए गए।

वीडियाे एनालिसिस कर अपनी कमजोरी दूर करना। इसके लिए एनआईएस पटियाला की मदद लेना।

जीतू राय, शूटिंग

30 साल के जीतू राय ने 10 मीटर एयर पिस्टल में देश को गोल्ड दिलाया। यह उनका दूसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड था। उन्होंने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में 50 मीटर फ्री पिस्टल में सोना जीता था। पर इस बार वे इस इवेंट में मेडल नहीं जीत सके।

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