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लोगों ने एप सेे 80 हजार शिकायतें दूर करवाईं, हमें फीडबैक दिया, सफाई से खुश हैं हम: सर्वे टीम

3 वर्ष पहले
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स्वच्छ सर्वे में हमें सबसे पहले इंदौर मिला था। यह कहकर यहां भेजा गया था कि जितने मानक हमारे हैं, उन सबके हिसाब से व्यवस्थाएं देखें, ताकि एक पैरामीटर फिक्स किया जा सके। इंदौर में 358 लोकेशन दी गई और करीब एक हजार लोगों से बात करने के लिए कहा गया। यह कहना है केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई सर्वेक्षण टीम के सदस्य अतुल कुमार पटेल का। पटेल ने बताया कैसे इंदौर सफाई में नंबर-1 बना। उनके मुताबिक यहां सबसे चौंकाने वाली चीज थी कचरा कलेक्शन से लेकर उसके निपटान का तरीका और प्रक्रिया। यह पहला शहर ऐसा मिला जिसने अपनी सीमा में ही वह सब कर दिया, जो दूसरे शहरों में होता ही नहीं है। यहां एप-311 से लगभग 80 हजार शिकायतें निपटाई गईं। यह जनता के साथ किसी सिस्टम का अद्भुत और अलग उदाहरण था। पॉजीटिव फीडबैक मिला तो सवाल खड़ा हुआ कि जो बताया है वह सच में है या नहीं? हमने ट्रेंचिंग ग्राउंड के आंकड़े पहले डीपीआर में देखे। बताया गया कि आठ एकड़ में बगीचा बना दिया है। हम वहां गए और एरिया नापा तो सब कुछ मिला। कुछ और स्थान भी जांचे। फिर भी यही सवाल खड़ा हुआ कि सरकारी सिस्टम में इतना परफेक्शन कैसे हो सकता है? हम सोच रहे थे कि नं. 1 शहर है तो कुछ गलतियां भी होंगी। इसके बावजूद लोगों ने माना कि सफाई लगातार होती है। शेष | पेज 10 पर (इंदौर फ्रंट पेज भी पढ़ें)

4 प्रमुख बातें, जो हमारे लिए अहम रही

1. स्वच्छ भारत मिशन का जितना हल्ला इंदौर में देखा, वैसा कहीं नहीं। सभी 500 कचरा गाड़ियाें में एक ही गाना बजता मिला।

2. जनता का फीडबैक पूरी तरह पॉजीटिव था।

3. कहीं भी कचरा, प्लास्टिक फैला नहीं मिला। वहीं मिला जहां होना चाहिए। जैसे- डस्टबिन हो या कचरा ट्रांसफर स्टेशन। आठ स्टेशन देखे। सभी अत्याधुनिक थे। वहां भी गंदगी नहीं मिली।

4. खाद बनाने की सैकड़ों इकाइयां इतने कम समय में लगाने का काम इंदौर ने किया।



अब 24 घंटे सफाई को जीते हैं हम

रात में होने वाली सफाई इंदौर का यूएसपी

इस शहर ने सफाई का जो मैकेनिज्म वेस्ट मैनेजमेंट के मानकों के अनुसार किया, उसी से वह अव्वल आया। हमारे सर्वे को तीन साल ही हुए। पहले सर्वे में इंदौर नहीं था, लेकिन दूसरे सर्वे में यह नं. 1 आया था। तीसरे सर्वे में भी यही बात सामने आई कि इंदौर ने जो काम शुरू किया था, उसकी स्पीड बरकरार रखी। फिर कई शहरों के लोग इंदौर सीखने के लिए गए। शहरों में कचरे को खत्म करने की सबसे बड़ी समस्या होती है, लेकिन इंदौर ने वह शहर के अंदर रखते ही कर लिया। यही बड़ी बात थी। हमने तीन बातें इंदौर में जांचीं- नगर निगम की भूमिका की जांच, जनता की भागीदारी और औचक निरीक्षण। रात में होने वाली सफाई शहर का यूएसपी था। -हरदीप सिंह पुरी, आवास व शहरी विकास राज्यमंत्री

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