1. स्वच्छ भारत मिशन का जितना हल्ला इंदौर में देखा, वैसा कहीं नहीं। सभी 500 कचरा गाड़ियाें में एक ही गाना बजता मिला।
2. जनता का फीडबैक पूरी तरह पॉजीटिव था।
3. कहीं भी कचरा, प्लास्टिक फैला नहीं मिला। वहीं मिला जहां होना चाहिए। जैसे- डस्टबिन हो या कचरा ट्रांसफर स्टेशन। आठ स्टेशन देखे। सभी अत्याधुनिक थे। वहां भी गंदगी नहीं मिली।
4. खाद बनाने की सैकड़ों इकाइयां इतने कम समय में लगाने का काम इंदौर ने किया।
इंदौर की प्रेरणा ने मुंबई का बैंड स्टैंड...
इसे ताउम्र बरकरार रखना है। साथ ही यह भी देखना है कि हमारे बाद यह जिम्मेदारी कौन लेगा। शायद इस तरह इंदौर में एक बार फिर नज़र आने लगें चींटियों को आटा डालने वाले, सड़कों पर राहगीरों को पानी पिलाने वाले, मुस्कराहटें बांटने वाले लोग। नंबर वन होने के बाद अब इंदौर को तीन कहावतों को अमल में लाना चाहिए। पहले उस चीनी कहावत पर जो कहती है, “टू बिकम ए सेंट, क्योर पीपल, फीड पीपल।’ मतलब अगर आप संत बनना चाहते हैं तो लोगों का इलाज कीजिए, उनका पेट भरिए। दूसरी, जब आपका कद बढ़ना बंद हो जाए तो हर इंसान दरख़्त लगाए।। इंदौर के वो लोग जिन्होंने शहर को सफाई में अव्वल बनाया, वे अब इसे हराभरा भविष्य दें और तीसरी, लव ईच अदर ऑर पेरिश यानी इंसान-इंसान से प्रेम करे या फ़ना हो जाए। ’