एमजीएम मेडिकल कॉलेज की एक्जीक्यूटिव काउंसिल में कमिश्नर प्रमुख होते हैं। पांच साल में कमिश्नर रहते हुए संजय दुबे ने एमवायएच में कायाकल्प जैसे प्रोजेक्ट चलाए, लेकिन उनके पांच साल के कार्यकाल में जो भी कलेक्टर इंदौर में रहा, उसने एमवायएच को कमिश्नर का प्रोजेक्ट मानकर दूरी बनाए रखी, लेकिन कमिश्नर पद पर बदलाव के बाद राघवेंद्र सिंह ने कमान संभालते ही अपनी अलग शैली में काम शुरू करते हुए सभी को आगे बढ़कर एमवायएच में दौरे के लिए बुलाया और शुक्रवार को पहला बड़ा दौरा किया। इस दौरान कलेक्टर निशांत वरवड़े के साथ ही निगमायुक्त आशीष सिंह व अन्य अधिकारी भी थे। कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारी भी सौंप दी, जिससे सभी टीम के रूप में मिलकर एमवायएच में सुधार और बदलाव के लिए काम करें।
त्रिपाठी और नरहरि दोनों ने रखी दूरी : आकाश त्रिपाठी साल 2012 से 2015 तक कलेक्टर रहे, इस दौरान वह एक ही बार एमवायएच रात में गए थे। साल 2013 में दुबे के कमिश्नर बनने के बाद वह एमवायएच नहीं गए और कमिश्नर ने एमवायएच को मिशन मानकर कायाकल्प शुरू किया। साल 2015 मई में पी. नरहरि कलेक्टर बने और साल 2017 जून तक रहे, लेकिन एमवायएच में कमिश्नर के काम देखते हुए वह भी दूर रहे। जून 2017 में कलेक्टर बनने के बाद निशांत वरवड़े भी एमवायएच नहीं गए और अब कमिश्नर बदलने के बाद उन्होंने वहां सिंह के साथ दौरा किया।