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सुविचार जिंदगी कितनी भी मुश्किल हो जाए, एक बात याद रखिए कि- कोई तो ऐसा काम जरूर होगा, जिसे आप कर सकें और सफल भी हो सकें।

3 वर्ष पहले
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इंदौर. कहते हैं कला का कोई दायरा नहीं होता, इच्छाशक्ति हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है। ऐसा ही एक जज्बा देखने को मिला इंदौर के राकेश वर्मा की कला में। राकेश ने कला के क्षेत्र में अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है। उन्होंने चौराहे पर लगी महापुरुषों के स्टैच्यू देख आमजन के छोटे स्टैच्यू बनाने शुरू किए। राकेश की इस कला को पूर्व राष्ट्रपति कलाम से लेकर नोबल पुररस्कार प्राप्त कैलाश सत्यार्थी तक सराह चुके हैं।



- राकेश वर्मा ने बताया कि मुझे छोटे स्टैच्यू बनाने की प्रेरणा चौराहों पर प्रसिद्ध हस्तियों और नेताओं के स्टैच्यू से मिली। इन्हें देख उनके मन में ख्याल आया कि क्यों ना आमजन खुद की या उसके परिजन की मूर्ति अपने पास रख सके। वर्मा ने दो साल पहले इस पर काम शुरू किया। उन्होंने क्ले से ऐसी मूर्ति बनाना शुरू की। अब तक वे एपीजे कलाम, कैलाश सत्यार्थी के साथ ही सैंकड़ों लोगों की प्रतिमा बना चुके हैं।

 

-  राकेश ने बताया कि उन्होंने मल्टी मीडिया में डिप्लोमा लेने के बाद मूर्तिकला की ओर अपना रुख किया। उन्होंने इंटरनेट, बुक्स और अध्य माध्यम के जरिए अपनी कला को आगे बढ़ाया। से संवारने की कोशिश करता हूँ।

 

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