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गोरखनाथ धाम में बताया अधिक मास का महत्व

3 वर्ष पहले
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गुरु गोरखनाथ धाम में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें धाम के महंत नरेशनाथ ने कहा कि हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह होता है। जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्य करती है। नरेश नाथ ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुणा अधिक फल मिलता है। यही कारण है कि श्रद्धालु अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना लोक और परलोक सुधारने में जुट जाते हैं। उन्होंने कहा कि अधिक मास वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय ज्योतिष में सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है। इसका प्रकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब छह घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है जो हर तीन वर्ष में लगभग एक मास के बराबर हो जाता है।

इसे मल या पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं

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