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महाकवि सुमित्रानंदन पंत जयंती पर साहित्यिक संस्था राष्ट्रीय कवि संगम ने की काव्य गोष्ठी

3 वर्ष पहले
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सूखा सरोवर के पास प्रज्ञान परिसर में महाकवि सुमित्रानंदन पंत जयंती पर साहित्यिक संस्था राष्ट्रीय कवि संगम ने रात आठ बजे से काव्य गोष्ठी की। अध्यक्षता कर रहे विनोद कुशवाहा ने दीप प्रज्वलन कर चांद और रोटी कविता पढ़ी। तहसील शाखा अध्यक्ष ममता वाजपेयी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। पूजा अर्चना दर्शन तिवारी एवं स्वप्निल छेनिया ने की। काव्य गोष्ठी की शुरुआत अविनेश चंद्रवंशी ने माँ सरस्वती वंदना से की। विनय चौरे ने गीत गाया। साहित्यकार एसआर धोटे ने गणेश वंदना के माध्यम से पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण के प्रति अपनी चिंता से अवगत कराया। सृजनात्मकता के पर्याय बन चुके श्याम अजनेरिया की गज़लों में भी व्यंग्य का पुट नज़र आया। नोटबंदी और जीएसटी पर उनके तीखे व्यंग्यों ने गोष्ठी का रुख ही मोड़ दिया ।

होशंगाबाद के युवा कवि प्रमोद रघुवंशी ने मां पर केंद्रित यह पंक्तियां कहीं -कुदरत का दिया उपहार है मां। गुलाब भुम्मरकर ने सम सामयिक रचना पढ़ी -बच गया पूरा जलने से, खून हुआ सस्ता, महंगा हुआ पानी है। युवा कवि अनुराग दुबे ने कहा -डगानी नीम सी कड़वी जबान लगती है। कवि तरुण तिवारी तरु ने साम्प्रदायिक सद्भाव यह कहा-यहां पर हर मुसलमां, घर में हिंदुस्तान रखता है।

माखननगर के कवि हिमांशु सिंह हार्दिक ने कहा, कोई वादा करें चांदनी रात में, दर्द आधा करें चांदनी रात में। कवि आलोक शुक्ल अनूप ने यह हिदायत दी - तंग दिल बनोगे तो किसी के न हो सकोगे। कवि मदन बड़कुर तन्हाई की गज़ल दुश्मनी छोड़ चलो फिर से को श्रोताओं से सराहना मिली। स्वर्णा छेनिया की नई कविता यह थी- जब भी मुड़ती हूं तुमसे मिलने के लिए। अधूरी कहानी है ये जीवन है मेरा। ममता वाजपेयी ने एक गज़ल तरन्नुम में पेश की -जब से बनी हैं सड़कें मेरे गांव में, पगडंडियां मिटी हैं मेरे गांव में। संचालन कर रहे सतीश शमी बोले कौन आया है ज़िंदगी जैसा दिल में रहता है ज़िंदगी जैसा। राष्ट्रीय कवि संगम के जिलाध्यक्ष सुनील वाजपेयी तथा कार्यक्रम आयोजक स्वर्णा ने आभार प्रदर्शन किया।

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