इंदौर सियागंज किराना बाजार में साख का संकट गहराया
इंदौर| वर्तमान में किराना बाजार में दो तरह से साख का संकट खड़ा हो गया है। पहला उधार देने वालों की पूंजी डूबत खाते जाने का भय और दूसरा जीएसटी जांच दल द्वारा केवल इंदौर पर दबाव बनाना, जबकि बिना बिल का माल मप्र की सीमा में उदयपुर, प्रतापगढ़, जलगांव और नागपुर से आ रहा है। इससे समीप की सभी मंडियां पनप गई है। इंदौर का कारोबार दिनों दिन घटता जा रहा है। नकली माल ने अलग से इस बाजार की साख को बट्टा लगाया है। वरिष्ठ व्यापारियों का मत है कि कारोबार चलाने के लिए बाजार से अतिरिक्त पूंजी उधार लेना जरूरी है। यह प्रथा सदियों से चली आ रही है। रुपया वापस मांगना अथवा तलाश करना अपराध की श्रेणी में कैसे आता है। ऐसे प्रकरणों में पुलिस को कोई भी कार्रवाई करने के पहले जांच कर दूध का दूध पानी का पानी करना चाहिए। वर्तमान में व्यापारियों में पुलिस का भय व्याप्त है। वे अपनी सत्य बात को भी सिद्ध नहीं कर पा रहे हैं। बिना बिल के माल की जांच का दबदबा वर्षों से इंदौर केंद्र बना रहा है, जबकि राजस्थान, महाराष्ट्र की मंडियों से बिना बिल का खोपरा गोला, बूरा आकर खंडवा, खरगोन, भोपाल, इटारसी, नीमच, मंदसौर, जावरा रतलाम के आसपास के क्षेत्रों में बिक रहा है। इन मंडियों को पनपाने में सरकारी विभागों की अहम् भूमिका रखी जा रही है। कर अपवंचन रोकना ही एक उद्देश्य हो तो पूरे प्रदेश में समान रूप से कार्रवाई होना चाहिए। खोपरा गोला में 5 रुपए की और तेजी आ गई। कर्नाटक में चुनाव की वजह से आवक कमजोर पड़ी है। शकर भावों में आंशिक सुधार रहा। बिहार में मंडियों में मखाने का स्टॉक 80% समाप्त हो गया है। आगामी फसल चार माह बाद आएगी।